ILS लॉ कॉलेज की बढ़ी मुश्किलें, पूर्व छात्र को लौटाने होंगे ₹1.04 लाख और ब्याज…

ILS Law College Fee Refund: महाराष्ट्र सरकार ने पुणे के ILS लॉ कॉलेज को पूर्व छात्र से वसूली गई ₹1.04 लाख अतिरिक्त फीस लौटाने का आदेश दिया है। कॉलेज को इस रकम पर 6% सालाना ब्याज भी देना होगा।

Maharashtra: पुणे के प्रतिष्ठित ILS लॉ कॉलेज को अतिरिक्त फीस वसूली के मामले में बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कॉलेज को पूर्व छात्र मयूर गरुड से वसूली गई 1,04,863 रुपये की अतिरिक्त फीस ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है। कॉलेज को फीस की मूल राशि के साथ भुगतान किए जाने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

क्या है ILS लॉ कॉलेज फीस रिफंड का मामला?
यह मामला पूर्व छात्र मयूर गरुड से कॉलेज द्वारा वसूली गई अतिरिक्त फीस से जुड़ा है। छात्र ने कॉलेज की ओर से ली गई फीस को लेकर आपत्ति जताई थी और इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की थी।

मामले की जांच के बाद उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से कॉलेज को अतिरिक्त फीस वापस करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, कॉलेज ने इस आदेश को स्वीकार करने के बजाय बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट पहुंचा था फीस विवाद
ILS लॉ कॉलेज का संचालन इंडियन लॉ सोसायटी द्वारा किया जाता है। कॉलेज ने उच्च शिक्षा निदेशक के फीस रिफंड संबंधी आदेश को अदालत में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पहले जारी आदेश को वापस लेकर कॉलेज का पक्ष सुना जाएगा और इसके बाद मामले में नए सिरे से निर्णय लिया जाएगा।

इसके बाद कॉलेज को अपनी दलील रखने का अवसर दिया गया। मामले की दोबारा सुनवाई और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद सरकार ने अब नया आदेश जारी किया है।

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पूर्व छात्र को ₹1,04,863 लौटाने का आदेश
महाराष्ट्र सरकार के नए आदेश के मुताबिक, ILS लॉ कॉलेज को पूर्व छात्र मयूर गरुड से वसूली गई ₹1,04,863 की अतिरिक्त फीस वापस करनी होगी। इतना ही नहीं, कॉलेज को इस राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

यानी कॉलेज को केवल अतिरिक्त फीस वापस करने से मामला खत्म नहीं होगा। फीस जमा किए जाने से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक निर्धारित दर से ब्याज भी देना पड़ेगा।

कॉलेज की दलील नहीं मानी गई
मामले की दोबारा सुनवाई के दौरान कॉलेज की ओर से अतिरिक्त फीस वसूली को लेकर अपना पक्ष रखा गया। कॉलेज ने फीस से संबंधित अपनी दलीलें सरकार के सामने पेश कीं।

हालांकि, सरकार ने कॉलेज के पक्ष को स्वीकार नहीं किया और पूर्व छात्र को अतिरिक्त फीस ब्याज सहित वापस करने का आदेश जारी कर दिया। इस फैसले को फीस निर्धारण और छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूली के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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सैकड़ों छात्रों ने भी मांगा फीस रिफंड
ILS लॉ कॉलेज से जुड़ा यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सैकड़ों अन्य छात्रों ने भी अतिरिक्त फीस वापस करने की मांग की है। ऐसे में एक छात्र के मामले में आया यह आदेश दूसरे छात्रों के दावों पर भी असर डाल सकता है।

यदि समान परिस्थितियों में अन्य छात्रों से भी निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूली गई है, तो वे भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष फीस रिफंड की मांग कर सकते हैं।

फीस वसूली को लेकर क्यों अहम है यह फैसला?
उच्च शिक्षण संस्थानों में फीस का निर्धारण निर्धारित नियमों और संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी के आधार पर किया जाता है। ऐसे में बिना आवश्यक मंजूरी अतिरिक्त फीस वसूलने की शिकायतों पर सरकारी कार्रवाई छात्रों के हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ILS लॉ कॉलेज से जुड़े इस मामले में सरकार की ओर से दोबारा सुनवाई के बाद भी फीस वापसी का आदेश दिए जाने से यह संदेश गया है कि छात्रों से ली जाने वाली फीस को लेकर संस्थानों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

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