
Delhi में छात्रों का हंगामा, NEET 2026 और OSM के विरोध में NSUI का प्रदर्शन
NEET Paper Leak: दिल्ली में National Students’ Union of India (NSUI) ने मंगलवार को NEET 2026, CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था और स्कूलों में लागू की गई तीन भाषा नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने शास्त्री भवन के बाहर थाली-ताली बजाकर केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और National Testing Agency (NTA) के खिलाफ नारेबाजी की।
NEET विवाद को लेकर बढ़ता आक्रोश
देशभर में NEET परीक्षा को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और परिणाम प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच NSUI ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
तीन भाषा नीति और OSM पर भी विरोध
NSUI ने CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन का कहना है कि इस व्यवस्था को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इसके अलावा नौवीं और दसवीं कक्षाओं में लागू की गई तीन भाषा नीति का भी विरोध किया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि इस नीति को छात्रों और अभिभावकों पर “जबरन” थोपा जा रहा है, जिससे अतिरिक्त मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
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विनोद जाखड़ ने सरकार पर साधा निशाना
प्रदर्शन के दौरान NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष Vinod Jakhar ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय की लगातार विफलताओं से देशभर के छात्र नाराज हैं। उन्होंने कहा कि NEET 2026 और CBSE OSM को लेकर बनी अनिश्चितता ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्र हितों की अनदेखी कर रही है। विनोद जाखड़ ने कहा, “जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक NSUI का आंदोलन जारी रहेगा।”
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शिक्षा नीतियों को लेकर बढ़ रही राजनीति
हाल के दिनों में NEET परीक्षा, नई शिक्षा नीतियों और भाषा नीति को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्माया हुआ है। विपक्षी दल और छात्र संगठन लगातार सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा नीतियों पर स्पष्ट संवाद की कमी के कारण छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।
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