
बढ़ती गर्मी और प्रदूषण पर अलर्ट, मुकेश शर्मा बोले- प्रकृति दे रही आखिरी चेतावनी
World Environment Day: PSI इंडिया के मुकेश शर्मा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर कहा कि बढ़ते तापमान, पिघलते ग्लेशियर खतरे की घंटी हैं। जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए युवा आगे आएं।
हर साल बढ़ता तापमान, भीषण गर्मी की मार, धधकते जंगल, समुद्र का बढ़ता जलस्तर और तेजी से पिघलते ग्लेशियर… ये कोई सामान्य घटनाएं नहीं हैं, बल्कि प्रकृति द्वारा दी जा रही आखिरी चेतावनी हैं। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (PSI) इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा का कहना है कि यदि हम पर्यावरण संरक्षण के प्रति अब भी गंभीर नहीं हुए, तो आने वाले समय में बहुत देर हो जाएगी।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम (World Environment Day Theme)
पर्यावरण संरक्षण के प्रति दुनिया भर में जागरूकता की अलख जगाने के लिए हर साल 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाया जाता है। श्री मुकेश शर्मा ने बताया कि इस साल की विशेष थीम रखी गई है। यह थीम हमें याद दिलाती है कि हमारा भविष्य पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज प्रकृति की कितनी रक्षा करते हैं।
कंक्रीट के जंगल और बढ़ता प्रदूषण
मुकेश शर्मा के अनुसार, आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।
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पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों की बढ़ती संख्या और कारखानों से निकलने वाला कचरा हवा को जहरीला बना रहा है।
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हरे-भरे पेड़ों को काटकर ऊंची-ऊंची इमारतें और फैक्ट्रियां खड़ी की जा रही हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है।
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पेड़ों की कटाई के कारण लोग शुद्ध हवा और ऑक्सीजन के लिए तरस रहे हैं, जिससे बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं।
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प्रदूषण और वनों के नष्ट होने से कई वन्य जीव और दुर्लभ पौधों की प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म होने की कगार पर हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुकेश शर्मा ने दो मुख्य सुझाव दिए हैं। कार्बन डाइऑक्साइड और धूल-धुएं के उत्सर्जन को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना होगा। निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करने की आदत डालनी होगी। सिर्फ पेड़ लगाना काफी नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी ताकि भविष्य में मुफ्त और शुद्ध ऑक्सीजन मिल सके।
देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है असर
बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक सेहत को भी बिगाड़ रहा है। प्रदूषण के कारण पैदा होने वाली गंभीर बीमारियों के इलाज पर सरकार और आम जनता को बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, बढ़ती आबादी के दबाव और तेजी से होते शहरीकरण के कारण खेती योग्य भूमि लगातार कम हो रही है। जमीन की उर्वरा शक्ति (Fertility) घटने से अनाज की पैदावार में भी निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है, जो भविष्य के खाद्य संकट की ओर इशारा करती है।
पर्यावरण बचाने में युवाओं की भूमिका
श्री शर्मा का मानना है कि इस संकट से उबरने में देश के युवा वैज्ञानिक और स्कूल-कॉलेज के छात्र सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। युवा पीढ़ी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को घर-घर पहुंचा सकती है।
युवा अपनी दिनचर्या में अपनाएं ये छोटी आदतें
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प्लास्टिक बैग्स, कप और स्ट्रॉ का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।
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कम दूरी के लिए साइकिल या पैदल चलने की आदत डालें और सार्वजनिक वाहनों का अधिक उपयोग करें।
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वृक्षारोपण और पौधों की देखभाल को अपने पसंदीदा शौक (Hobby) में शामिल करें।
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अपने आस-पास के लोगों को जल और ऊर्जा संरक्षण के प्रति प्रेरित करें।
प्रकृति हमें जीवन देती है, और अब समय आ गया है कि हम प्रकृति को उसका जीवन वापस लौटाएं। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हमें कागजी वादों से आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर काम करना होगा।





