कंडोम बना ‘वार टूल ? मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़ गयी कंडोम की डिमांड…

Global Shock:  भारत में कंडोम का विशाल उद्योग है। यह प्रति वर्ष 40 करोड़ से अधिक कंडोम का उत्पादन करता है। लेकिन अब कंपनियां कच्चे माल की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत का सामना कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में कंडोम उत्पादन व उत्पाद की कीमतों में वृद्धि होने की अत्यधिक उम्मीद है।

किसी भी देश में युद्ध छिड़ जाने पर कंडोम की डिमांड बढ़ जाती है। क्या आप जानते हैं? आखिर ऐसा क्यों होता है? देश-विदेश में कंडोम उत्पाद अर्थात (निरोध) हालांकि निरोध भी एक कंपनी का ही नाम है। इन दिनों कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत की दोहरी मार झेल रहा है।

हथियारों को सुरक्षित रखने में कारगर: 

युद्ध के समय कंडोम सिर्फ एक हेल्थ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक उपयोगी “प्रोटेक्टिव टूल” भी बन जाता है। आमतौर पर कंडोम का इस्तेमाल यौन संबंधों के दौरान सुरक्षा, अनचाहे गर्भ से बचाव और HIV व अन्य यौन संचारित संक्रमणों से बचने के लिए किया जाता है।

लेकिन इसकी उपयोगिता सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। सैन्य परिस्थितियों में कंडोम का इस्तेमाल हथियारों और संवेदनशील उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए भी किया जाता है। यह धूल, पानी और नमी से बचाने में बेहद कारगर साबित होता है।

कंडोम एक मुलायम, लुब्रिकेटेड लेटेक्स या नाइट्राइल से बना होता है, जो पूरी तरह वॉटरप्रूफ होता है। इसकी यही खासियत इसे कठिन मौसम और युद्ध जैसी परिस्थितियों में उपकरणों की सुरक्षा के लिए उपयोगी बनाती है।

इसी कारण, कई बार सैन्य उपयोग में इसका इस्तेमाल हथियारों को खराब होने से बचाने और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए किया जाता है।

भारत का कंडोम बाजार कितना बड़ा?

भारत में कंडोम का विशाल उद्योग है, जिसकी कीमत लगभग 86 करोड़ डॉलर (लगभग 8,000 करोड़ रुपये से अधिक) है और यह प्रति वर्ष 40 करोड़ से अधिक कंडोम का उत्पादन करता है। लेकिन अब कंपनियां कच्चे माल की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत का सामना कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में कीमतों में वृद्धि की खबरें हैं।

युद्ध के समय क्यों बढ़ती है मांग?

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सप्लाई चेन प्रभावित होने से कंडोम की कीमतें बढ़ने की आशंका है। सैन्य उपयोग में ये हथियारों को धूल-पानी से बचाने, जरूरी सामान को सूखा रखने, विस्फोटक उपकरण सुरक्षित करने और आपातकालीन चिकित्सा में इस्तेमाल होते हैं, इसलिए युद्ध के समय इनकी मांग बढ़ जाती है। इसका उत्पादन करने में कच्चा माल बाहर से न आ पाने पर भारत में कंडोम उत्पादन करने वाली कंपनियों को भारी पड़ रहा है।

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खाड़ी देशों पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती:

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, खासकर:

  • सऊदी अरब
  • कतर
  • ओमान

इन देशों से आने वाला अमोनिया कुल आयात का करीब 86% हिस्सा है। युद्ध और तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। कंडोम निर्माता कंपनियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापार मार्गों में व्यवधान के कारण प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हुई है, जो एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य बना ‘बॉटलनेक’

चिकनाई के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन तेल जैसे प्रमुख पदार्थ मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि कंडोम को फटने से बचाने वाले निर्जल अमोनिया की कीमत में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी में आई बाधाओं से आपूर्ति प्रभावित हुई है।
कच्चे माल की कमी और एल्युमिनियम फॉयल और पीवीसी सहित पैकेजिंग सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन धीमा हो रहा है।

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लेखक:
डॉ जयशंकर प्रसाद शुक्ल
वरिष्ठ पत्रकार

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