सफेद बर्फ, अंतिम अरदास और हजारों श्रद्धालु… भावुक कर देगा हेमकुंड साहिब का ये नजारा

Hemkund Sahib: हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को साल की अंतिम अरदास के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। बर्फ की सफेद चादर में लिपटे पवित्र धाम में इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए करीब चार हजार श्रद्धालु मौजूद रहे। इस वर्ष रिकॉर्ड 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब में मत्था टेका।

Uttarakhand News: सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को साल की अंतिम अरदास के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने से एक दिन पहले शुक्रवार को धाम में जमकर बर्फबारी हुई, जिसके बाद पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर से ढक गया। बर्फ से ढके पहाड़ों और पवित्र सरोवर के आसपास का नजारा बेहद मनमोहक दिखाई दिया।

कठिन मौसम और बर्फीले रास्तों के बावजूद श्रद्धालु इस विशेष अवसर पर धाम पहुंचे और अंतिम अरदास में शामिल हुए। इसके साथ ही इस वर्ष की यात्रा का समापन हो गया और अब शीतकाल के दौरान श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का सिलसिला थम जाएगा।

रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे यात्रा सीजन में 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम पहुंचकर मत्था टेका। कपाट बंद होने के अवसर पर भी करीब चार हजार श्रद्धालु मौजूद रहे।

श्रद्धालुओं के लिए कपाट बंद होने का यह पल धार्मिक आस्था और भावनाओं से जुड़ा रहा। बर्फबारी के बीच अंतिम अरदास में शामिल होकर उन्होंने गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

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पाकिस्तान से आए 40 सिख श्रद्धालु भी बने साक्षी
हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के ऐतिहासिक अवसर पर पाकिस्तान से आया 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी मौजूद रहा। इस जत्थे की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया। श्रद्धालुओं ने बर्फ से ढके धाम में अंतिम अरदास में हिस्सा लिया और इस यादगार पल के साक्षी बने।

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बर्फ की सफेद चादर में ढका हेमकुंड साहिब
शुक्रवार को हुई बर्फबारी के बाद हेमकुंड साहिब और आसपास की पहाड़ियां पूरी तरह सफेद नजर आईं। प्रकृति के इस अद्भुत नजारे के बीच कपाट बंद होने की प्रक्रिया पूरी की गई। श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ बर्फ से ढके पवित्र धाम की खूबसूरती देखने का अवसर भी मिला।

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