ATM PIN 4 अंकों का ही क्यों रखा गया? इसके पीछे छिपी है बेहद रोचक कहानी

ATM PIN: आज के डिजिटल दौर में एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लगभग हर व्यक्ति अपने बैंक खाते से पैसे निकालने या भुगतान करने के लिए एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ATM PIN (Personal Identification Number) आमतौर पर सिर्फ 4 अंकों का ही क्यों होता है? आखिर 5, 6 या 8 अंकों का PIN क्यों नहीं रखा गया? इसके पीछे सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि इतिहास, मनोविज्ञान और सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प कहानी छिपी है।

एक सुझाव से हुई थी 4 अंकों वाले PIN की शुरुआत
ATM के आविष्कार का श्रेय ब्रिटिश इंजीनियर John Shepherd-Barron को दिया जाता है। जब उन्होंने एटीएम मशीन की अवधारणा विकसित की, तब शुरुआत में उन्होंने 6 अंकों का PIN रखने का विचार बनाया था।

हालांकि, जब उन्होंने इस बारे में अपनी पत्नी से चर्चा की, तो उनकी पत्नी ने बताया कि वह 6 अंकों का नंबर आसानी से याद नहीं रख पातीं और अधिकतम 4 अंक ही सहजता से याद रख सकती हैं। इसके बाद जॉन शेफर्ड-बैरन ने PIN को 6 अंकों के बजाय 4 अंकों का रखने का निर्णय लिया। यही सुझाव आगे चलकर पूरी दुनिया में मानक (स्टैंडर्ड) बन गया।

वैज्ञानिकों ने भी माना सही फैसला
बाद के वर्षों में कई शोधों में यह पाया गया कि अधिकांश लोग 4 अंकों के नंबर को आसानी से याद रख सकते हैं। यदि PIN बहुत लंबा हो, तो लोग उसे भूलने लगते हैं या फिर उसे कहीं लिखकर रखने लगते हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 4 अंकों का PIN याद रखने में आसान होने के साथ-साथ सुरक्षा के लिहाज से भी पर्याप्त माना जाता है।

4 अंकों में भी हैं 10,000 संभावित संयोजन
कई लोगों को लगता है कि केवल 4 अंक होने से PIN आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन वास्तविकता अलग है।

चार अंकों वाले PIN में 0000 से 9999 तक कुल 10,000 अलग-अलग संयोजन (Combinations) संभव होते हैं।

इसके अलावा बैंक सुरक्षा के लिए कई अतिरिक्त उपाय भी अपनाते हैं, जैसे—

  • लगातार गलत PIN डालने पर कार्ड ब्लॉक हो जाना।
  • सीमित प्रयास (आमतौर पर 3 बार) की अनुमति।
  • एन्क्रिप्शन तकनीक के जरिए PIN की सुरक्षा।
  • संदिग्ध लेन-देन पर निगरानी।

यानी सिर्फ PIN की लंबाई ही सुरक्षा तय नहीं करती, बल्कि पूरी बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली मिलकर ग्राहक के खाते की रक्षा करती है।

कुछ बैंक 6 अंकों का PIN भी देते हैं
हालांकि दुनिया के अधिकांश बैंक आज भी 4 अंकों वाला PIN इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुछ देशों और कुछ बैंकिंग सेवाओं में 6 अंकों का PIN भी उपयोग किया जाता है। मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और कुछ विशेष सुरक्षा प्रणालियों में लंबे PIN का विकल्प भी उपलब्ध है।

फिर भी सामान्य एटीएम और डेबिट कार्ड के लिए 4 अंकों वाला PIN सबसे अधिक प्रचलित है क्योंकि यह सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखता है।

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PIN बनाते समय रखें ये सावधानियां
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि PIN बनाते समय जन्मतिथि, मोबाइल नंबर के अंतिम अंक, 1234, 0000, 1111 या 9999 जैसे आसान नंबरों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा अपना PIN किसी के साथ साझा न करें, एटीएम पर PIN डालते समय कीपैड को हाथ से ढकें और समय-समय पर PIN बदलते रहें।

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आज भी क्यों कायम है 4 अंकों का सिस्टम?
तकनीक लगातार बदल रही है और अब फिंगरप्रिंट, फेस आईडी तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद 4 अंकों वाला ATM PIN आज भी दुनिया के अधिकांश बैंकों में उपयोग किया जाता है क्योंकि यह उपयोगकर्ता की सुविधा, याद रखने में सरलता और सुरक्षा के बीच एक प्रभावी संतुलन प्रदान करता है।

यही वजह है कि दशकों पहले लिया गया एक साधारण-सा निर्णय आज भी वैश्विक बैंकिंग प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

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