
सावधान! भारत में महंगा होगा दाना-पानी:जेपी मॉर्गन
खाद की बढ़ती लागत सरकार के लिए बड़ी चुनौती
2027 में पड़ेगी वैश्विक महंगाई की मार
दिल्ली। साल 2027 में दुनिया के साथ भारत में भी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। वैश्विक वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन ने अनुमान जताया है कि 2027 की पहली छमाही में वैश्विक खाद्य महंगाई करीब 5 फीसदी तक पहुंच सकती है। 2026 की पहली छमाही में यह करीब 2.8 फीसदी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे तीन बड़े कारण बताए गए हैं अल-नीनो का खतरा, खाद की आपूर्ति में कमी और भू-राजनीतिक तनाव। कम बारिश की स्थिति में फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जबकि युद्ध और ऊर्जा संकट के चलते खाद की कीमतें बढ़ने का दबाव है।
भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। अगर बारिश कमजोर रहती है और साथ ही उर्वरकों की कीमत बढ़ती है, तो किसानों की लागत बढ़ने के साथ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है। हालांकि, अल-नीनो का असर हर साल एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। खाद की बढ़ती लागत सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकती है। 2026-27 के केंद्रीय बजट में उर्वरक सब्सिडी का प्रावधान करीब ₹1.71 लाख करोड़ है। आधिकारिक बजट दस्तावेज में यह आंकड़ा ₹1,70,799 करोड़ दर्ज है।
जेपी मॉर्गन की चेतावनी का सीधा मतलब यह नहीं है कि भारत में हर खाद्य वस्तु की कीमत 5 फीसदी बढ़ जाएगी, बल्कि यह वैश्विक खाद्य महंगाई के जोखिम का अनुमान है। भारत में वास्तविक असर मानसून, घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों और वैश्विक खाद-ऊर्जा कीमतों पर निर्भर करेगा। यानी 2027 में महंगे खाने का खतरा तीन मोर्चों से बढ़ सकता है। कमजोर मानसून, महंगी खाद और बढ़ती वैश्विक महंगाई।





