Ayodhya: राम मंदिर चंदा विवाद मे SIT का बड़ा खुलासा, गायब हैं सोने-चांदी के रिकॉर्ड

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ाए गए 3,500 करोड़ रुपये के कैश और सोने-चांदी के रिकॉर्ड गायब होने का विवाद गहरा गया है। यूपी सरकार की SIT ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंप दी है।

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के नकद चंदे और सोने-चांदी के आभूषणों के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा प्रक्रियाओं में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।

6 साल पहले मिली थी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 फरवरी 2020 को ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन किया गया था। तब से लेकर अब तक लगभग 3,500 करोड़ रुपये का नकद दान मिलने का अनुमान है।

ताजा खुलासे के मुताबिक, नवंबर 2020 में ही एक प्रतिष्ठित निजी ऑडिट फर्म ने इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट को लेकर एक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई थी कि ट्रस्ट का प्रबंधन बेहद गैर-पेशेवर है और यहाँ दान का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। हालांकि, उस समय इस चेतावनी और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने की सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया गया।

SIT की शुरुआती जांच में सामने आईं ये बड़ी खामियां

  1. पारदर्शिता की कमी: दान पेटियों से नकदी निकालने, उसे कार्यालय तक ले जाने और उसकी गिनती करने की पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा उपायों और पारदर्शिता की भारी कमी पाई गई।

  2. सोने-चांदी का गायब रिकॉर्ड: ट्रस्ट की तिमाही बैठकों में नकद चंदे का ब्योरा तो पेश किया जाता था, लेकिन भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों का रिकॉर्ड या तो अधूरा मिला या पूरी तरह गायब था।

  3. टेंडर और खरीद में गड़बड़ी: मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सामानों की खरीद प्रक्रिया में तय नियमों की अनदेखी के संकेत मिले हैं।

  4. भाई-भतीजावाद: जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने मंदिर प्रशासन और वीआईपी (VIP) व्यवस्थाओं के भीतर अपने रिश्तेदारों को नौकरियां दिलवाईं।

45 दिन का सीसीटीवी बैकअप बना चुनौती

मामले की जांच कर रही SIT के सामने इस समय सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती डिजिटल साक्ष्यों की कमी है। मंदिर परिसर का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज केवल 45 दिनों तक ही स्टोर रहता है। ऐसे में पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण टीम को गवाहों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। SIT ने सिफारिश की है कि इस बैकअप अवधि को बढ़ाकर कम से कम 180 दिन किया जाए।

आगे की कार्रवाई

संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए गए कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से चंदा गिनती और बैंकिंग प्रक्रियाओं से हटा दिया गया है। लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली SIT अगले 10 से 15 दिनों में अपनी विस्तृत अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। दूसरी ओर, इस पूरे मामले की कोर्ट की निगरानी में सीबीआई (CBI) जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।

Back to top button