दंतेवाड़ा में बड़ी सफलता… 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, कई प्रमुख कमांडर शामिल

CG Maoist Surrender: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एंटी-नक्सल ऑपरेशन के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस और अन्य फोर्स के दबाव और एनकाउंटर की आशंका के चलते 71 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। इनमें 50 पुरुष और 21 महिला नक्सली शामिल हैं।

प्रमुख आत्मसमर्पित नक्सली और उनके इनाम
आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नक्सली हैं, जिन पर सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं। प्रमुख नक्सली और उनके इनाम इस प्रकार हैं:

  • बामन मड़काम: 8 लाख रुपये, कई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में शामिल
  • शमिला उर्फ सोमली कवासी: 5 लाख रुपये, मोबाइल टावर जलाने और अन्य अपराध
  • गंगी उर्फ रोहनी बारसे: 5 लाख रुपये, 2024 में भामरागढ़ में मुठभेड़ में शामिल
  • देवे उर्फ कविता माड़वी: 5 लाख रुपये, दक्षिण बस्तर डिवीजन में मुठभेड़ में शामिल
  • जोगा मड़काम: 2 लाख रुपये, 2018 और 2021 में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में शामिल

अभियान और पुनर्वास
दंतेवाड़ा के एसपी गौरव राय ने बताया कि यह आत्मसमर्पण ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) और ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आईये) अभियान के तहत हुआ है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि पुलिस और फोर्स की सक्रियता और सख्त एक्शन के कारण माओवादी संगठन में दहशत है और नक्सलियों के पास अब केवल आत्मसमर्पण ही विकल्प बचा है।

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नक्सलियों को मिलेगा पुनर्वास लाभ
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत कई लाभ दिए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • 50,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता राशि
  • कौशल विकास प्रशिक्षण
  • स्वरोजगार के अवसर

पुलिस अधीक्षक गौरव राय के अनुसार, “पुलिस की आक्रामक रणनीति और लगातार अभियानों के कारण माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है, जिसका नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में नक्सली अब आत्मसमर्पण कर रहे हैं।”

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‘लोन वर्राटू’ अभियान की सफलता
‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत अब तक 1,113 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। दंतेवाड़ा पुलिस ने आत्मसमर्पित नक्सलियों से एक बार फिर हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और सद्भाव की राह अपनाने की अपील की है।

यह आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है और राज्य में शांति बहाली की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

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