चोरी के शक में महिला की बेरहमी से पिटाई, वीडियो वायरल होने के बाद दो गिरफ्तार

Bengaluru News: बेंगलुरु से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। शहर के व्यस्त एवेन्यू रोड पर एक कपड़े की दुकान के मालिक और उसके साथी ने चोरी के शक में एक महिला को दिनदहाड़े सड़क पर घसीटकर पीटा। महिला को जूतों से मारा गया और बेरहमी से लात-घूसों से हमला किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को एक राहगीर ने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

चोरी के शक में की गई पिटाई
जानकारी के मुताबिक, घटना तब हुई जब महिला पर साड़ी चोरी करने का आरोप लगाया गया। इस आरोप के बाद दुकान मालिक उमेद राम और उसका साथी महेंद्र शर्मा भड़क गए और महिला को सड़क पर घसीटते हुए जूतों से पिटाई कर डाली। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि महिला दर्द से कराह रही थी और बचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मौके पर मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे और किसी ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की।

पुलिस की लापरवाही पर सवाल
घटना के बाद चौकाने वाली बात यह थी कि उल्टा महिला पर ही चोरी का केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया, जबकि हमलावरों के खिलाफ शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर पुलिस पर गंभीर लापरवाही और पक्षपात के आरोप लगे।

वीडियो वायरल और विरोध प्रदर्शन
मामला तब गरमाया जब यह वीडियो एवेन्यू रोड के व्यापारियों के व्हाट्सएप ग्रुप से निकलकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद जनता में आक्रोश फैल गया। प्रोकन्नड़ संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की।


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पुलिस कमिश्नर की दखल
बढ़ते गुस्से और विरोध को देखते हुए पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने खुद मामले में दखल दिया। उन्होंने तुरंत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद सिटी मार्केट पुलिस ने दोनों आरोपियों उमेद राम और महेंद्र शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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कानून से बड़ा कोई नहीं
यह घटना न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी को सजा देने का हक कानून से ऊपर जाकर आम नागरिकों को दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून को हाथ में लेने की यह प्रवृत्ति समाज के लिए खतरनाक है और ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई होना बेहद जरूरी है।

यह घटना पुलिस और समाज दोनों के लिए एक बड़ा सबक है कि किसी भी आरोप का फैसला केवल अदालत कर सकती है, न कि सड़क पर भीड़ या दुकान मालिक।

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