
Share Market: शेयर बाजार में आई गिरावट, जाने वजह क्यों हुआ ऐसा…
Share Market Update: भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को फिर गिरावट देखी गई. लगातार चौथे दिन विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार की रफ्तार थाम दी. दोपहर 1 बजे तक Sensex 266 अंक गिरकर 83,712 पर और Nifty50 96 अंक टूटकर 25,666 पर आ गया. निवेशकों ने मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में मुनाफा वसूला. वहीं Titan, Bharti Airtel और HDFC Life जैसे शेयरों में हल्की बढ़त दिखी.
बाजार में गिरावट का कारण:
शेयर बाजार में मंगलवार को कमजोरी का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर एशियाई संकेत और प्रॉफिट बुकिंग रहा. बाजार फिलहाल एक “कंसोलिडेशन ज़ोन” में फंसा हुआ है.
FII की लगातार बिकवाली- विदेशी निवेशकों ने सोमवार को ₹1,883 करोड़ के शेयर बेचे. यह 29 अक्टूबर से लगातार चौथा दिन है जब FIIs ने भारतीय इक्विटीज में बिकवाली की है.चार कारोबारी सत्रों में FIIs ने कुल ₹14,269 करोड़ की सेलिंग की है.Geojit Financial Services के डॉ. वी.के. विजयकुमार का कहना है-भारत में वैल्यूएशन ऊंचे हैं और अर्निंग्स ग्रोथ सीमित. यही वजह है कि विदेशी निवेशक अब सस्ते और तेजी से बढ़ते बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं.”
ग्लोबल मार्केट से कमजोर संकेत- एशियाई बाजारों में भी मुनाफा वसूली देखी गई South Korea’s Kospi, Japan’s Nikkei 225 और China’s Shanghai Composite लाल निशान में रहे.वहीं US Futures भी 1% तक टूटे, जिससे वॉल स्ट्रीट में कमजोर शुरुआत की आशंका है.कमजोर ग्लोबल सेंटीमेंट और विदेशी बिकवाली के दोहरे दबाव ने भारतीय बाजार को नीचे खींचा.
तिमाही नतीजे- बैंकिंग सेक्टर की अर्निंग्स स्थिर रहीं, लेकिन IT सेक्टर के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे.विजयकुमार के मुताबिक, FY26 की कमाई ग्रोथ सुस्त रहेगी, लेकिन FY27 में 15% सुधार की उम्मीद है जिसे बाजार जल्द ही डिस्काउंट करना शुरू कर सकता है.”
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार फिलहाल “रेंज-बाउंड” रहेगा जब तक कोई बड़ा ग्लोबल संकेत या घरेलू नीति अपडेट नहीं आता. वहीं निवेशक IPO और स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन पर फोकस रख रहे हैं.
डेरिवेटिव्स एक्सपायरी का असर- Nifty Weekly Expiry से पहले ट्रेडर्स अपने पोजिशन रोलओवर कर रहे हैं, जिससे वॉलैटिलिटी बढ़ी. एनालिस्ट्स का कहना है कि यह तकनीकी उतार-चढ़ाव का हिस्सा है.
IT शेयरों में दबाव- अमेरिका से कमजोर आर्थिक डेटा और फेड अधिकारियों के मिले-जुले बयानों से दिसंबर में दर कटौती की संभावना घट गई.TCS और Infosys जैसे हैवीवेट स्टॉक्स में 1% तक गिरावट रही, जिसने IT इंडेक्स पर दबाव बनाया.





