
राबड़ी आवास विवाद पर गरमाई राजनीति, RJD की जिद से बढ़ी पार्टी की फजीहत
Bihar News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर विवाद का माहौल तब बन गया जब पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पुराने सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस भेजा गया। इस नोटिस को लेकर आरजेडी नेताओं और समर्थकों ने बिहार सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
मामला इतना तूल पकड़ रहा है कि राजनीतिक जानकार इसे आरजेडी की “जिद की राजनीति” और “स्वघोषित टकराव रणनीति” से जोड़कर देख रहे हैं।
चारा घोटाला याद दिलाता है CBi का संघर्ष
यह विवाद तब और दिलचस्प हो जाता है जब इसे उस दौर से जोड़ा जाता है, जब लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में जांच के दायरे में आए थे।
सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक उपेन विश्वास ने एक बार खुलासा किया था कि लालू यादव की गिरफ्तारी के दिनों में सीबीआई को इतना प्रतिरोध झेलना पड़ा कि उन्हें जांच के दौरान सेना की मदद तक लेनी पड़ी। वे घर से निकलते समय अपनी पत्नी से कह कर जाते थे कि “अगर वापस न लौट पाऊँ तो घबराना मत।”
उसी दौर की याद दिलाते हुए राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि अब राबड़ी आवास विवाद में आरजेडी समर्थकों का रवैया भी वैसा ही दिख रहा है—धमकी, जिद और टकराव।
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RJD समर्थकों की हरकतों से बढ़ी पार्टी की मुश्किलें
हाल के विधानसभा चुनाव में आरजेडी को भारी नुकसान हुआ। 2015 में 80 और 2020 में 75 सीटें जीतने वाली आरजेडी इस बार केवल 25 सीटों पर सिमट गई।राजनीतिक विश्लेषण बताता है कि इस हार में आरजेडी समर्थक गायकों और उनके गीतों ने बड़ी भूमिका निभाई। इन विवादित गीतों ने भाजपा के “जंगल राज” वाले आरोपों को और पुख्ता कर दिया।
जानकारी के अनुसार, तेजस्वी यादव ने इस चुनावी नुकसान से सबक लेते हुए 30 से अधिक ऐसे गायकों को कानूनी नोटिस भेजा है जिन्होंने भड़काऊ गीत गाए थे।
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सरकारी बंगला विवाद: RJD की जिद से फिर नुकसान की आशंका
राबड़ी देवी को पुराने मुख्यमंत्री आवास को खाली करने के लिए जो नोटिस मिला है, वह सरकारी आवास आवंटन विभाग की कार्रवाई है।
लेकिन आरजेडी नेता इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो:
- सरकारी निर्णय आसानी से पलटे नहीं जाते,
- राहत यदि मिलेगी तो केवल अदालत से,
- और ज़िद करके इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना आरजेडी के लिए उलटा असर डाल सकता है।
आरजेडी की छवि पहले ही “जिद और जबरिया राजनीति” वाली बनती रही है—जैसे चारा घोटाले के दौरान लालू की गिरफ्तारी रोकने की कोशिशें और पटना के शो रूम से शादी के लिए गाड़ियाँ जबरन उठवाए जाने का पुराना विवाद।
इन्हीं कदमों ने जनता में आरजेडी के प्रति अविश्वास बढ़ाया और पार्टी को राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा।
क्या बंगला विवाद भी बनेगा आरजेडी के लिए ‘स्व-घोषित नुकसान’?
विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह आरजेडी समर्थक आक्रामक प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वह पार्टी की पहले से कमजोर हो चुकी छवि को और क्षति पहुँचा सकता है।
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