
कार्तिगई दीपम विवाद… आदेश न मानने पर मुख्य सचिव और ADGP को किया तलब
Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने तिरुपरनकुंद्रम दीपम विवाद मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तमिलनाडु के मुख्य सचिव और एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) को 17 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह आदेश अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया।
यह अवमानना याचिका राम रविकुमार द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने अदालत के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया।
मामला क्या है?
तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान दीप प्रज्वलन की अनुमति को लेकर विवाद चल रहा था। अदालत ने पहले ही आदेश दिया था कि 3 दिसंबर को मंदिर प्रबंधन दीये जलाने की व्यवस्था करे, लेकिन यह आदेश लागू नहीं हुआ।
इसके बाद हाईकोर्ट ने विशेष अनुमति देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता और 10 अन्य लोग CISF सुरक्षा के साथ दीप जला सकते हैं।
अधिकारियों पर अवमानना का आरोप
याचिकाकर्ता रविकुमार ने आरोप लगाया कि:
- मदुरै के जिलाधिकारी
- पुलिस आयुक्त
- तिरुपरनकुंद्रम मंदिर के कार्यकारी अधिकारी
जानबूझकर अदालत के आदेश को लागू नहीं कर रहे थे और मामले को खींचने का प्रयास कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल वीरा कथिरावन ने अदालत को बताया कि:
- तमिलनाडु सरकार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में SLP दाखिल की है
- यह याचिका अभी तक लंबित है
इसके बावजूद जस्टिस जी.R. स्वामीनाथन ने पाया कि आदेश का पालन नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने मुख्य सचिव और ADGP (लॉ एंड ऑर्डर) को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।
इसके साथ ही:
- मदुरै के डीसीपी को भी वैधानिक नोटिस जारी किया गया है
- नोटिस में पूछा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए
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निषेधाज्ञा भी रद्द
4 दिसंबर को अदालत ने:
- जिलाधिकारी द्वारा कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान लगाई गई निषेधाज्ञा (prohibitory orders) को रद्द कर दिया
- साथ ही अवमानना याचिका पर आगे की सुनवाई शुरू की
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अगली सुनवाई
17 दिसंबर 2025 को अगली सुनवाई होगी और उस दिन:
- तमिलनाडु के मुख्य सचिव
- ADGP (लॉ एंड ऑर्डर)
को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
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