
Bhopal डिक्लेरेशन सम्मेलन में कांग्रेस विधायक के बिगड़े बोल… BJP तिलमिलाई
Bhopal Declaration: अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहने वाले भांडेर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने एक बार फिर विवादित बयान देकर सियासत में हलचल मचा दी है।
मंगलवार को ‘भोपाल डिक्लेरेशन- दो’ के सम्मेलन में बरैया ने दलित-आदिवासी सांसदों और विधायकों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी सांसद और विधायक “जानवरों जैसी स्थिति” में हैं और उन्हें कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में हनुमान जी की प्रतिमाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कोशिश की जानी चाहिए कि आदिवासी हिंदू न बन पाएँ।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मंच पर मौजूद
बरैया के बयान के दौरान मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे, लेकिन किसी ने उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया।
प्रदेश कांग्रेस ने इस बयान से दूरी जताई। कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले ने कहा:
“यह दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। संविधान में सभी नागरिकों की बराबरी है। यह विधायक का व्यक्तिगत विचार हो सकता है, पार्टी का ऐसा कोई विचार नहीं है। सार्वजनिक मंच पर इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए।”
भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
उधर, भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि फूल सिंह बरैया लगातार विवादित बयान देते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व की मौन चुप्पी इन बयानों की सहमति को दर्शाती है। अग्रवाल ने कहा:
“कांग्रेस बंटवारे की राजनीति करना चाहती है। ऐसे बयान मानसिक दिवालियापन की श्रेणी में आते हैं और समाज तथा कानून दोनों के लिए अस्वीकार्य हैं।”
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बरैया का तर्क और चुनाव व्यवस्था पर बयान
बरैया ने अपने भाषण में वर्तमान चुनाव व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि एससी/एसटी प्रतिनिधियों की स्थिति दबाव में है। उन्होंने सुझाव दिया कि अलग चुनाव व्यवस्था होनी चाहिए और उनके समुदाय से बनने वाली कमेटी ही प्रत्याशी का चयन करे, ताकि वे सही प्रतिनिधित्व कर सकें।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक बराबरी मिली है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक बराबरी अभी बाकी है।
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सियासत में हलचल
बरैया के बयान ने कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी जंग को और तेज कर दिया है।
- कांग्रेस ने बयान से किनारा किया है
- भाजपा ने इसे कांग्रेस की सहमति और मानसिक दिवालियापन बताया
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादित बयान राजनीतिक माहौल को गर्म करने के साथ-साथ समाज में असमानता और जातिगत भावनाओं को भड़का सकते हैं।
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