
O Romeo Review: शाहिद-तृप्ति की ‘आशिकी’ में कितना दम? जानें कैसी है ओ रोमियो
O Romeo Review: विशाल भारद्वाज के डायरेक्शन में बनी शाहिद कपूर की जिस फिल्म का बेसब्री से आपको इंतजार था यानी ‘ओ रोमियो’ फाइनली सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। अगर आप फिल्म देखने का प्लान कर रहे हैं, तो पहले रिव्यू पढ़ लीजिए।
O Romeo Review: फिल्म का ‘ओ रोमियो’ का रोमियो शेक्सपियर की कहानी के नायक से अलग है। यह गाली-गलौज करता है, खूब बहाता है। लेकिन जब बात की इश्क की आती है तो कुर्बान होने से पीछे नहीं हटता है। इसी जुनून को विशाल भारद्वाज निर्देशित फिल्म ‘ओ रोमियो’ में शाहिद कपूर ने बड़े पर्दे उतारने की कोशिश की है। फिल्म की कहानी, शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की एक्टिंग और विशाल का निर्देशन दर्शकों को कैसा लगा? फैंस नर फिल्म को लेकर कैसा रिव्यू दिया? जानिए।
क्या है फिल्म की कहानी
ओ रोमियो की कहानी एक सुपारी किलर उस्तरा की है, जो खुफिया एजेंसी के लिए काम करता है. वहीं अफशान के रोल में तृप्ति डिमरी उन्हें एक सुपारी देने आती हैं. जिसके बाद फिल्म के अंदर बदला और फिर आशिकी और मोहब्बत को दिखाया गया है. लेकिन फिल्म वह इंप्रेशन नहीं जमा पाती, जैसा की शुरुआत में लगता है. ओ रोमियो को देखकर एक बात कही जा सकती है कि विशाल भारद्वाज की सोच में यह फिल्म काफी अच्छी रही होगी, लेकिन पर्दे पर उताने में उन्होंने कई खामियां छोड़ दीं.
जानें कैसी है कलाकारो की एक्टिंग
ओ रोमियो में नाना पाटेकर और फरीदा जलाल जैसे दिग्गज और मंझे हुए कलाकार हैं. लेकिन फिल्म देखकर लगता है कि विशाल भारद्वाज इन दोनों ही कलाकारों का फिल्म में अच्छे से इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं. ओ रोमियो में नाना पाटेकर खान साब के रोल में हैं. जो शाहिद कपूर पर हर तरीके से भारी पड़ते हैं. वहीं फरीदा जलाल ने शाहिद कपूर की दादी का किरदार निभाती नजर आ रही हैं. इसके अलावा तृप्ति डिमरी ने अपने करियर की अब तक की बेस्ट परफॉर्मेंस दी है. कई जगहों पर उन्होंने ताली मार एक्टिंग की है. बाकि फिल्म में अविनाश तिवारी,दिशा पटानी और तमन्ना भाटिया का औसत काम है.
निर्देशन और म्यूजिक
विशाल भारद्वाज मकबूल, कमीने, इशकियां और हैदर जैसी शानदार फिल्में दे चुके हैं, लेकिन ओ रोमियो को देखकर कहा जा सकता है कि विशाल भारद्वाज अब सिनेमा में अपनी चमक खोते जा रहे हैं, क्योंकि ओ रोमियो अलग-अलग हिस्से में अच्छी फिल्म लगती है, लेकिन पूरी फिल्म के तौर पर देखा जाए तो पूरी तरह से भटकी हुई नजर आती है.
फिल्म में एक बहुत खूबसूरत सीन है जहां अल्ला की इबादत करने वाली अफशा बप्पा से कुछ मांगती हैं और कहती हैं कि क्या ये सिर्फ आपकी दुआएं पूरी करते हैं, मेरी भी करेंगे, ऐसे कुछ विशाल भारद्वाज ही सोच सकते हैं.
फिल्म के अंदर कभी-कभी शाहिद कपूर की अलग कहानी दिखती है तो कही तृप्ति डिमरी की. कई बार फिल्म देखकर कहा जा सकता है कि विशाल बाबू क्या दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. फिल्म अंत में देवदास की छाप छोड़ जाती है, जो कई बार पर्दे पर अलग-अलग कलाकारों के जरिए देखी जा चुकी है.





