चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में JE दोषी करार, पति पत्नी की करतूत सुन खून खौल जाएगा

UP News: चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में बांदा कोर्ट का बड़ा फैसला. सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी को फांसी की सजा. 34 बच्चों के शोषण और वीडियो विदेशों में बेचने के दोष में मिली सजा.

UP News: पैसे और हवस के लालच में इंसान किस हद तक गिर सकता है, यूपी के जनपद चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती का मामला इसकी सबसे भयानक मिसाल है। 50 से ज्यादा मासूम बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स पर बेचने वाले इस दरिंदे दंपती को आखिरकार अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है। सीबीआई की जांच में सामने आया यह मामला सिर्फ बाल यौन शोषण का नहीं था, बल्कि मासूमों की आड़ में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का भी पर्दाफाश था।

विदेशों में बेचे जाते थे बच्चों के अश्लील वीडियो

सीबीआई (CBI) की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि जेई रामभवन बच्चों के साथ गंदी हरकतें करता था और उनके अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेव पर बेच लाखों रुपये कमाता था. साल 2020 में गिरफ्तारी के वक्त रामभवन के घर से कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए थे, जिनसे पोर्नोग्राफी को इंटरनेट पर अपलोड करने और विदेशों में बेचने के अहम सुराग मिले थे. इंटरपोल से मिली टिप के बाद सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी.

डार्क वेब पर मासूमों का ‘सौदा’

रामभवन का मकसद सिर्फ अपनी हवस मिटाना नहीं था, बल्कि वह इन बच्चों के जरिए पैसा कमाना चाहता था। शोषण के दौरान रामभवन बच्चों की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बनाता था। इन वीडियो और तस्वीरों को वह डार्क वेब और इंटरनेशनल पोर्न वेबसाइट्स पर बेचता था। ईमेल जांच में खुलासा हुआ था कि वह देश-विदेश के कई चाइल्ड पोर्नोग्राफी गिरोहों के संपर्क में था। इतना ही नहीं, वह पीड़ित परिवारों को यही तस्वीरें दिखाकर ब्लैकमेल कर पैसों की भी मांग करता था।

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डिजिटल सबूतों ने पहुंचाया फांसी के फंदे तक

चित्रकूट, हमीरपुर और बांदा में 10 सालों तक 50 से ज्यादा बच्चों की जिंदगी बर्बाद करने वाले इस जेई का पाप तब सामने आया जब सीबीआई की 10 सदस्यीय टीम ने डिप्टी एसपी अमित कुमार की अगुवाई में इसे गिरफ्तार किया। अदालत में रामभवन और दुर्गावती को फांसी की सजा तक पहुंचाने में उनके पास से मिले तकनीकी साक्ष्यों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

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पीड़ित परिवारों को मिलेगा मुआवजा

अदालत ने इस मामले की गंभीरता और बच्चों के साथ हुए अन्याय को देखते हुए राज्य सरकार को कड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि इस अपराध से प्रभावित हुए पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को सरकार 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दे. इस फैसले के बाद से बांदा समेत पूरे प्रदेश में इस मामले की चर्चा हो रही है.

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