
“महाराष्ट्र में बुलडोजर संस्कृति न घुसने दें”, प्रशासन को बॉम्बे हाई कोर्ट की चेतावनी…
Bulldozer Culture: Bombay High Court की औरंगाबाद बेंच ने छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए “बुलडोजर संस्कृति” को लेकर तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र में इस तरह की संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए और यह “UP या बिहार नहीं है।”
कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर उठाए सवाल
मामला AIMIM पार्षद मतीन पटेल और निवासी हनीफ खान से जुड़ी संपत्तियों को गिराए जाने का था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए और अदालतों के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की।
इस पर जस्टिस Siddheshwar Thombre की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान सख्त मौखिक टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का घर बनाना आसान नहीं होता और आम लोग बड़ी मुश्किल से अपना आशियाना तैयार कर पाते हैं।
“हर कोई घर बनाने में सक्षम नहीं”
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, “घर बनाना कोई आसान काम नहीं है। हर कोई आपकी और मेरी तरह आसानी से घर बनाने का खर्च नहीं उठा सकता।” अदालत ने नगर निगम की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रशासन कानून के दायरे में रहकर काम नहीं करेगा तो नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित होंगे।
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‘बुलडोजर संस्कृति’ पर बड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत की सबसे चर्चित टिप्पणी रही—“महाराष्ट्र में बुलडोजर संस्कृति को घुसने न दें। यह UP या बिहार नहीं है।” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है।
हाल के वर्षों में कई राज्यों में अवैध निर्माण और आरोपियों की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विवाद खड़े हुए हैं। विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने कई बार ऐसी कार्रवाइयों को कानून प्रक्रिया के खिलाफ बताया है, जबकि सरकारें इन्हें अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान बताती रही हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का जिक्र
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि किसी भी तोड़फोड़ कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक संस्थाओं को कानून के तहत ही कार्रवाई करनी चाहिए।
मामले की अगली सुनवाई में अदालत नगर निगम से जवाब तलब कर सकती है। फिलहाल हाई कोर्ट की टिप्पणी ने बुलडोजर कार्रवाई और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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