
UP Politics: CM योगी ने ऑन किया चुनावी मोड, प्रभारी मंत्रियों के जिलों में बड़ा फेरबदल
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल करते हुए 60 प्रभारी मंत्रियों के जिलों में बदलाव किया है। जानें किसे कहां की मिली जिम्मेदारी।
UP Politics: उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रहे हैं। राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और विकास कार्यों को जमीन पर उतारने के लिए योगी सरकार ने प्रभारी मंत्रियों के जिलों में एक बहुत बड़ा फेरबदल किया है। सरकार द्वारा जारी नई सूची में कुल 60 मंत्रियों की भूमिकाएं और उनके जिले तय किए गए हैं।
कैबिनेट मंत्रियों को मिली दोहरे जिलों की कमान
सरकार द्वारा जारी नई सूची में कई कद्दावर कैबिनेट मंत्रियों को दो-दो महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी देकर उनके सियासी कद को मजबूत किया गया है:
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बेबी रानी मौर्य (महिला कल्याण मंत्री): इटावा और हाथरस।
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लक्ष्मी नारायण चौधरी: अलीगढ़ और फिरोजाबाद।
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जयवीर सिंह: झांसी और फ़र्रुखाबाद।
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धर्मपाल सिंह: गाज़ियाबाद और रामपुर।
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नंद गोपाल गुप्ता “नंदी”: मिर्जापुर और चित्रकूट।
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अनिल राजभर: आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर।
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राकेश सचान: रायबरेली और कन्नौज।
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अरविंद कुमार शर्मा (नगर विकास मंत्री): जौनपुर और भदोही।
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दारा सिंह चौहान: कुशीनगर और श्रावस्ती।
इन मंत्रियों को मिली एकल और औद्योगिक बेल्ट की जिम्मेदारी
कुछ मंत्रियों को उनकी राजनीतिक और औद्योगिक महत्ता के आधार पर विशेष जिलों का इकलौता प्रभारी बनाया गया है:
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योगेन्द्र उपाध्याय: कानपुर नगर।
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आशीष पटेल: गोंडा।
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संजय निषाद: कानपुर देहात।
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ओम प्रकाश राजभर: अम्बेडकरनगर।
नए मंत्रियों को भी मैदान में उतारा
योगी सरकार ने हाल ही में मंत्रिमंडल में शामिल हुए नए मंत्रियों को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है:
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भूपेंद्र चौधरी: आगरा और कासगंज।
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मनोज पांडेय: सीतापुर।
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सुनील कुमार शर्मा: सहारनपुर।
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अनिल कुमार: मुरादाबाद।
राज्यमंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) को भी मिले अहम जिले
चुनावी और प्रशासनिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को साधने के लिए राज्यमंत्रियों की फौज को भी मैदान में उतारा गया है:
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नितिन अग्रवाल: लखीमपुर खीरी।
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कपिल देव अग्रवाल: बिजनौर।
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रवींद्र जायसवाल: गाजीपुर।
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संदीप सिंह: कृष्ण नगरी मथुरा।
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गुलाब देवी: अमरोहा।
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गिरीश चंद्र यादव: सुल्तानपुर।
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धर्मवीर प्रजापति: मैनपुरी।
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असीम अरुण: हरदोई और मेरठ (दोहरी जिम्मेदारी)।
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जेपीएस राठौर: संभल और बरेली।
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दयाशंकर सिंह: देवरिया और मऊ।
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नरेंद्र कुमार कश्यप: शाहजहांपुर।
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दिनेश प्रताप सिंह: बांदा और बहराइच।
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अरुण कुमार सक्सेना: बदायूं।
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दयाशंकर मिश्र “दयालु” (आयुष मंत्री): बलिया और महराजगंज।
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अजीत सिंह पाल: फतेहपुर।
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सोमेंद्र तोमर: मुजफ्फरनगर।
क्या समय से पहले होंगे विधानसभा चुनाव?
सीएम योगी आदित्यनाथ के इस अचानक और बड़े फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि प्रभारियों के जिलों में यह बदलाव आगामी चुनावी रणनीति (Mission 2027) को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जा सके और जनता के बीच मंत्रियों की सक्रियता को बढ़ाया जा सके।
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इस नए बदलाव के तहत शीर्ष नेतृत्व को किसी विशेष जिले के प्रभार से मुक्त रखा गया है, ताकि वे पूरी सरकार और सभी 75 जिलों की बेहतर ढंग से मॉनिटरिंग कर सकें। इस बड़े फेरबदल के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक बार फिर चुनाव समय से पहले होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
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