
Delhi की B&B नीति बनी ‘टाइम बम’? हौज रानी हादसे के बाद बड़े सवाल…
Delhi Fire: दिल्ली के हौज रानी इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी में बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) नीति के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘फ्लोरिश स्टे’ नाम से संचालित इस प्रतिष्ठान में लगी आग के बाद सामने आए तथ्यों ने प्रशासनिक निगरानी और नियमों के पालन की पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि जिस लाइसेंस के तहत इस संपत्ति को केवल 6 कमरों तक सीमित रहना था, वहां कथित तौर पर 25 कमरे व्यावसायिक रूप से किराये पर चलाए जा रहे थे। इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस जारी हुआ था, उसे स्वयं उसी परिसर में रहना अनिवार्य था, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं था।
घरेलू कनेक्शन पर चल रहा था ‘होटल’
जांच में यह भी सामने आया कि फ्लोरिश स्टे को बिजली और पानी की आपूर्ति घरेलू दरों पर मिल रही थी, जबकि वहां व्यावसायिक गतिविधियां बड़े स्तर पर संचालित हो रही थीं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतने बड़े स्तर पर नियमों के उल्लंघन के बावजूद संबंधित एजेंसियां कार्रवाई क्यों नहीं कर सकीं।
मामले में नगर निगम (MCD), बिजली वितरण कंपनी BSES, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन किसी विभाग ने गंभीरता से जांच नहीं की।
क्या है दिल्ली की B&B नीति?
दिल्ली में बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति की शुरुआत वर्ष 2007 में की गई थी। इसकी पृष्ठभूमि 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी हुई थी। उस समय राजधानी में पर्यटकों के ठहरने के लिए पर्याप्त होटल और कमरे उपलब्ध नहीं थे।
तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री अम्बिका सोनी ने सुझाव दिया था कि लोग अपने घरों के कुछ कमरे पर्यटकों को किराये पर उपलब्ध कराएं। इसी विचार के आधार पर B&B नीति लागू की गई, ताकि पर्यटकों को कम लागत में ठहरने की सुविधा मिल सके और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त आय का अवसर भी प्राप्त हो।
नीति के तहत मकान मालिक सीमित संख्या में कमरे किराये पर दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए कई नियम और शर्तें तय की गई थीं।
नियमों की खुलेआम अनदेखी?
हौज रानी अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या B&B नीति का इस्तेमाल अब अवैध गेस्ट हाउस और मिनी होटल चलाने के लिए किया जा रहा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि कई रिहायशी इलाकों में B&B लाइसेंस की आड़ में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों को परेशानी होती है, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने पर बड़े हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।
फायर सेफ्टी, पार्किंग, आपात निकासी और भवन मानकों जैसे नियमों का पालन कई जगहों पर नहीं किया जाता, जिससे रिहायशी इलाकों में खतरा लगातार बढ़ रहा है।
कई एजेंसियों की निगरानी पर सवाल
मामले ने यह भी उजागर किया है कि अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी किस तरह गंभीर समस्या बन सकती है। अगर किसी परिसर में घरेलू कनेक्शन पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं, तो बिजली और पानी विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? अगर वहां बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना था, तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने ध्यान क्यों नहीं दिया?
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में ऐसी कई संपत्तियां हो सकती हैं, जहां नियमों का उल्लंघन कर B&B लाइसेंस की आड़ में व्यवसाय चलाया जा रहा हो।
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हादसे के बाद सख्ती की मांग
हौज रानी की घटना के बाद अब B&B नीति की समीक्षा और सख्त निगरानी की मांग तेज हो गई है। शहरी विकास और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में संचालित ऐसे प्रतिष्ठानों का नियमित ऑडिट होना चाहिए।
साथ ही फायर एनओसी, भवन सुरक्षा और व्यावसायिक उपयोग के नियमों की कड़ाई से जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
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क्या बदलेगी नीति?
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों पर अब दबाव बढ़ रहा है कि वे B&B नीति के दुरुपयोग को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी करें। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में लाइसेंस प्रक्रिया, निरीक्षण व्यवस्था और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई को और सख्त बनाया जा सकता है।
हौज रानी अग्निकांड ने यह साफ कर दिया है कि अगर निगरानी कमजोर रही, तो रिहायशी इलाकों में चल रही ऐसी गतिविधियां किसी बड़े खतरे में बदल सकती हैं।
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