मणिपुर में हालात फिर बिगड़े, गोलीबारी और आगजनी से फैली दहशत

Manipur Violence: मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय और सामुदायिक तनाव के बीच एक बार फिर हिंसा की बड़ी घटना सामने आई है। कामजोंग जिले के कुलतूह कुकी गांव में गुरुवार तड़के संदिग्ध मिलिटेंट्स द्वारा की गई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और सुरक्षा बलों ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमला सुबह करीब 4:55 बजे हुआ। हमलावरों ने गांव में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिससे दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। गोलीबारी के बाद कई घरों में आग लगा दी गई, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान हुआ। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया गया।

लगातार बढ़ रही हिंसा की घटनाएं
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले ही कांगपोकपी जिले में छह नगा नागरिकों के शव बरामद किए गए थे। आशंका जताई जा रही है कि ये वही छह लोग हैं, जिन्हें 13 मई को लीलोन वैफेई गांव से अगवा किया गया था। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक डीएनए जांच और अन्य प्रक्रियाओं के बाद ही अंतिम पुष्टि की बात कही है।

छह शवों की बरामदगी और अब कामजोंग में हुई गोलीबारी ने राज्य में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और कई इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

नगा समुदाय में आक्रोश
छह लोगों के शव मिलने की खबर के बाद नगा समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार को विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए।

प्रदर्शन के दौरान सेनापति जिले के लियांगमै ताफौ क्षेत्र में स्थित नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के कार्यालय में भी आग लगा दी गई। इस घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी
कामजोंग में हुए हमले के बाद पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया है। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमले के पीछे कौन-सा समूह या संगठन शामिल हो सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी गई है।

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लंबे समय से अशांत है मणिपुर
मणिपुर पिछले कई वर्षों से विभिन्न समुदायों के बीच तनाव और हिंसक घटनाओं का सामना कर रहा है। समय-समय पर होने वाली झड़पें, अपहरण, आगजनी और गोलीबारी की घटनाएं राज्य में शांति व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि राज्य में अभी भी कई संवेदनशील मुद्दे पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं। ऐसे में सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने शांति बहाली और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कायम करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

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हालात पर केंद्र और राज्य की नजर
कामजोंग और कांगपोकपी की घटनाओं के बाद राज्य प्रशासन ने हालात की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। वहीं केंद्र सरकार भी राज्य की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

फिलहाल कामजोंग में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई है और प्रभावित गांवों में राहत एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने एक बार फिर मणिपुर में शांति और स्थिरता की चुनौती को सामने ला दिया है।

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