कूटनीति पर भारी पड़ा युद्ध, लेबनान संकट के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता रद्द

Iran US War Ceasefire Deal: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक अचानक रद्द कर दी गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता को लेकर काफी उम्मीदें जताई जा रही थीं, खासकर तब जब एक दिन पहले फ्रांस में शांति समझौते (पीस डील) को लेकर सकारात्मक प्रगति की खबरें सामने आई थीं। लेकिन अब वार्ता स्थगित होने से क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक रद्द होने के पीछे लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच लगातार बढ़ता सैन्य संघर्ष एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात ने कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर डाला है।

लेबनान में लगातार जारी हैं हमले
लेबनान और इजराइल के बीच सीमा पर पिछले कई दिनों से संघर्ष जारी है। लेबनानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार को हुए इजराइली हवाई और जमीनी हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। कई इलाकों में भारी तबाही की खबरें भी सामने आई हैं।

इजराइली सेना का कहना है कि उसकी कार्रवाई हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर की जा रही है। वहीं लेबनान की ओर से दावा किया जा रहा है कि हमलों का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है, जिससे मानवीय संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।

हिजबुल्लाह के हमलों में इजराइल को नुकसान
दूसरी ओर हिजबुल्लाह ने भी इजराइली ठिकानों और सैन्य इकाइयों पर हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हालिया हमलों में एक टैंक बटालियन कमांडर सहित चार इजराइली सैनिकों की मौत हुई है।

इन घटनाओं ने इजराइल के भीतर भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। उत्तरी सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही हैं।

इजराइली मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद
संघर्ष के बीच इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir का बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सैनिकों की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि “पूरा लेबनान जलना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से आग्रह किया है कि हर इजराइली मां के आंसुओं के बदले हजारों लेबनानी परिवारों को इसकी कीमत चुकानी चाहिए।

बेन ग्वीर के इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार संगठनों और कई विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं।

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अमेरिका-ईरान वार्ता पर पड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में बढ़ते संघर्ष ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया को प्रभावित किया है। ईरान लंबे समय से हिजबुल्लाह का समर्थक माना जाता है, जबकि अमेरिका इजराइल का प्रमुख सहयोगी है।

ऐसे में क्षेत्र में बढ़ती हिंसा के बीच दोनों देशों के लिए शांतिपूर्ण संवाद को आगे बढ़ाना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से वार्ता को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा नहीं की गई है और भविष्य में नई तारीख तय की जा सकती है।

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मध्य पूर्व में बढ़ी अनिश्चितता
विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा हालात केवल इजराइल और लेबनान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इससे क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका भी बढ़ सकती है, जिससे हालात और जटिल हो सकते हैं।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका, ईरान, इजराइल और क्षेत्र के अन्य देश तनाव कम करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। लेकिन लेबनान में जारी हमलों और कड़े बयानों के बीच शांति की राह फिलहाल कठिन नजर आ रही है।

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