हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई पर ट्रंप चिंतित…. सुझाया नया रास्ता

Donald Trump Statement: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हिजबुल्लाह को लेकर एक नया और विवादास्पद प्रस्ताव पेश किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को बिना बड़े पैमाने पर नागरिक हताहतों के जारी नहीं रख पा रहा है, तो इस जिम्मेदारी को सीरिया संभाल सकता है।

ट्रंप ने विशेष रूप से सीरिया के राष्ट्रपति Ahmed al-Sharaa का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हिजबुल्लाह के प्रति बेहद सख्त रुख रखते हैं और संगठन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता रखते हैं। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पश्चिम एशिया के रणनीतिक समीकरणों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

क्या है ट्रंप का ‘प्लान B’?
जी-7 सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि इजरायल लंबे समय से हिजबुल्लाह के खिलाफ संघर्ष कर रहा है, लेकिन इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इजरायल इस अभियान को सीमित नुकसान के साथ संचालित नहीं कर पा रहा है, तो सीरिया इस भूमिका को निभा सकता है।

ट्रंप ने कहा, “अगर इजरायल यह काम बिना दूसरों को मारे नहीं कर सकता, तो शरआ यह काम करेंगे। सीरिया यह काम करेगा।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब लेबनान सीमा पर इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अहमद अल-शरआ की खुलकर की तारीफ
ट्रंप ने सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरआ की सराहना करते हुए उन्हें “अद्भुत काम करने वाला नेता” बताया। उन्होंने कहा कि शरआ हिजबुल्लाह को बिल्कुल पसंद नहीं करते और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के इच्छुक हैं।

हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि शरआ का अतीत विवादों से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि वह “कोई बॉय स्काउट नहीं हैं”, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें एक सक्षम और प्रभावी नेता के रूप में देखा जाना चाहिए।

क्यों अहम है यह बयान?
ट्रंप का यह प्रस्ताव कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली वजह यह है कि सीरिया और हिजबुल्लाह दोनों लंबे समय तक क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में जुड़े रहे हैं। ऐसे में सीरिया को हिजबुल्लाह के खिलाफ सक्रिय भूमिका देने का सुझाव क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

दूसरी ओर, यह बयान इस बात का भी संकेत देता है कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर सकता है, जहां पारंपरिक सहयोगियों और विरोधियों की भूमिकाएं बदलती नजर आ रही हैं।

इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष बना वैश्विक चिंता
पिछले कई महीनों से इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमा क्षेत्रों में रॉकेट हमले, हवाई कार्रवाई और सैन्य अभियानों के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।

मानवाधिकार संगठनों ने भी नागरिक हताहतों पर चिंता व्यक्त की है। ऐसे में ट्रंप का बयान इस बहस को और तेज कर सकता है कि हिजबुल्लाह से निपटने के लिए कौन-सी रणनीति अधिक प्रभावी और मानवीय होगी।

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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर टिकी नजर
ट्रंप के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि इजरायल, सीरिया और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को लेकर अमेरिकी सोच का संकेत भी हो सकता है।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सीरिया वास्तव में ऐसी किसी भूमिका के लिए तैयार है या नहीं, लेकिन ट्रंप की टिप्पणी ने क्षेत्रीय कूटनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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बदलते समीकरणों का संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व की राजनीति तेजी से बदल रही है। पुराने गठबंधन कमजोर हो रहे हैं और नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का “प्लान B” केवल हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में उभर रहे नए भू-राजनीतिक समीकरणों की झलक भी पेश करता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह विचार केवल राजनीतिक बयान बनकर रह जाता है या फिर किसी व्यापक रणनीतिक चर्चा का हिस्सा बनता है।

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