
‘कुछ सीखिए मोदी जी’, Trump-Meloni बयानबाजी के बीच केजरीवाल का वार…
Arvind Kejriwal Post: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट किया है। केजरीवाल ने इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच कथित बयानबाजी का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसा।
केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि किसी भी देश के नेता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश की गरिमा और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के नेताओं के सामने “भीगी बिल्ली” बनकर नहीं बैठना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा को ठेस नहीं पहुंचने देनी चाहिए।
क्या कहा केजरीवाल ने?
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने लिखा:
“प्रधान मंत्री जी, ऐसे जवाब देते हैं ट्रम्प को। कुछ सीखिये। भीगी बिल्ली बनके नहीं बैठते उसके सामने। देश की बेइज्जती नहीं करवाते।”
केजरीवाल ने यह टिप्पणी उस कथित घटनाक्रम के संदर्भ में की, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी के बीच बयानबाजी की चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
प्रधान मंत्री जी, ऐसे जवाब देते हैं ट्रम्प को। कुछ सीखिये। भीगी बिल्ली बनके नहीं बैठते उसके सामने। देश की बेइज्जती नहीं करवाते। https://t.co/2vFQBoxyWg
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 19, 2026
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
केजरीवाल के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी इसे भारत के सम्मान और मजबूत कूटनीतिक रुख से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि भाजपा समर्थक इसे प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति और वैश्विक नेतृत्व पर अनावश्यक राजनीतिक हमला बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस तरह की बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
केजरीवाल की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक वर्ग ने उनके बयान का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक छवि और भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
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सियासी संदेश या कूटनीतिक बहस?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान केवल अंतरराष्ट्रीय नेताओं की टिप्पणियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए घरेलू राजनीति में भी संदेश देने की कोशिश की गई है। ऐसे समय में जब भारत की विदेश नीति और वैश्विक मंचों पर उसकी भूमिका लगातार चर्चा में है, विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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