
हवाई सफर पर महंगाई की मार! फ्लाइट टिकट 25% तक हो सकते हैं महंगे…
Airfare may go up: अगर आप आने वाले महीनों में परिवार के साथ छुट्टियां मनाने या किसी जरूरी काम से हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। देश और दुनिया में फ्लाइट टिकटों की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों पर पड़ सकता है।
वैश्विक परामर्श कंपनी मैकिन्से की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और जेट ईंधन की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत तेजी से बढ़ रही है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो एयरलाइंस कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ यात्रियों पर डाल सकती हैं।
क्यों महंगा हो सकता है हवाई सफर?
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी एयरलाइन के कुल संचालन खर्च का बड़ा हिस्सा विमान ईंधन यानी जेट फ्यूल पर खर्च होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित होने और रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता पर दबाव बढ़ने से जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
इसके अलावा मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर विमानन उद्योग पर पड़ रहा है।
घरेलू यात्राओं पर भी पड़ेगा असर
यदि टिकट कीमतों में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है तो इसका सीधा असर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार की चार सदस्यों की घरेलू यात्रा का कुल खर्च अभी लगभग 40 हजार रुपये है, तो किरायों में बढ़ोतरी के बाद यही खर्च बढ़कर करीब 50 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।
विदेश यात्रा होगी और महंगी
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है। दुबई, लंदन, सिंगापुर, बैंकॉक और यूरोप के अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के लिए टिकट कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
यदि किसी परिवार का विदेश यात्रा पर टिकट खर्च वर्तमान में लगभग एक लाख रुपये आता है, तो 25 प्रतिशत वृद्धि के बाद यही खर्च बढ़कर करीब 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
एयरलाइंस कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
एयरलाइंस कंपनियां पहले से ही ईंधन लागत, हवाई अड्डा शुल्क, रखरखाव खर्च और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में जेट फ्यूल की कीमतों में और वृद्धि होने पर कंपनियों के लिए मौजूदा किराये पर संचालन करना मुश्किल हो सकता है।
विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की ओर से करों में राहत या ईंधन कीमतों में स्थिरता नहीं आती है, तो एयरलाइंस के पास किराये बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प बचेंगे।
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यात्रियों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञ यात्रियों को सलाह दे रहे हैं कि यदि वे आने वाले महीनों में यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो टिकटों की अग्रिम बुकिंग कर लें। आमतौर पर पहले से बुकिंग करने पर किराये अपेक्षाकृत कम रहते हैं और संभावित मूल्य वृद्धि का असर भी कम पड़ता है।
इसके अलावा यात्रियों को विभिन्न एयरलाइंस के किरायों की तुलना करने और ऑफर तथा छूट योजनाओं पर नजर रखने की भी सलाह दी जा रही है।
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वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा आगे का रुख
फिलहाल विमानन उद्योग की नजर वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर टिकी हुई है। यदि जेट ईंधन की आपूर्ति सामान्य होती है और अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होते हैं तो टिकट कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। लेकिन यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो यात्रियों को आने वाले समय में महंगे हवाई सफर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
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