
रोहित यादव ने भाला फेंक में जीता गोल्ड, वर्ल्ड रैंकिंग में नीरज चोपड़ा से निकले आगे
Rohit Yadav Javelin: जौनपुर के रोहित यादव ने 87.05m थ्रो के साथ नीरज चोपड़ा को पछाड़ा। बने देश के नंबर-1 और दुनिया के नंबर-2 भाला फेंक खिलाड़ी। एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई।
Rohit Yadav Javelin: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर 25 वर्षीय रोहित यादव ने भाला फेंक (Javelin Throw) की दुनिया में वो मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के अंतिम दिन रोहित ने 87.05 मीटर का हैरतअंगेज थ्रो फेंककर न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता, बल्कि दिग्गज स्टार नीरज चोपड़ा को भी इस सीजन की ग्लोबल लिस्ट में पीछे छोड़ दिया।
देश में नंबर-1, दुनिया में नंबर-2
इस धमाकेदार प्रदर्शन के साथ ही रोहित यादव इस सीजन में भारत के नंबर-1 और दुनिया के नंबर-2 भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं। इस समय वर्ल्ड रैंकिंग (Global Top List) में श्रीलंका के रशेल थरंगा पाथिरागे पहले स्थान पर हैं। वहीं, दो बार के ओलंपिक और वर्ल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा 85.69 मीटर के थ्रो के साथ फिलहाल इस लिस्ट में चौथे स्थान पर खिसक गए हैं।
रोहित का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने 2022 में मनु डीपी द्वारा बनाए गए 84.35 मीटर के मीट रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया है। इस बेमिसाल कामयाबी के साथ ही रोहित ने जापान में होने वाले एशियन गेम्स और ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी सीधे क्वालीफाई कर लिया है।
बांस के डंडे से शुरू हुआ था सफर
जौनपुर जिले के अदारी डभिया गांव के रहने वाले रोहित यादव की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। बेहद साधारण परिवार से आने वाले रोहित जब 14 साल के थे, तब उनके पास असली भाला खरीदने के पैसे नहीं थे। वह गांव के खेतों में बांस के डंडे को भाला बनाकर घंटों अभ्यास किया करते थे। उनके पिता सभाजीत यादव (जो खुद एक धावक रहे हैं) ने विपरीत परिस्थितियों में भी बेटे के हौसले को टूटने नहीं दिया और घर पर ही देसी तरीकों से उन्हें ट्रेन किया।
रोहित यादव ने जीत के बाद कहा
“मैं प्रैक्टिस में लगातार 85-86 मीटर की दूरी छू रहा था, लेकिन प्रतियोगिताओं में इसे दोहरा नहीं पा रहा था। आखिरी प्रयास में मुझे सही रिदम मिली और 87.05 मीटर का थ्रो लग गया। नीरज भाई से मेरी तुलना मत कीजिए, वो बहुत आगे हैं, लेकिन इस प्रदर्शन से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।”
घुटने और कोहनी की गंभीर चोटों से उबरकर रोहित यादव ने जो वापसी की है, उसने साबित कर दिया है कि अगर जिद पक्की हो, तो मिट्टी के लाल भी आसमान छू सकते हैं।





