सरकारी कामकाज में बड़ा बदलाव! पीएम मोदी ने ‘ब्यूरोक्रेटिक साइलो’ खत्म करने पर दिया जोर

PM Modi Meeting News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर देते हुए अधिकारियों को ‘ब्यूरोक्रेटिक साइलो’ यानी विभागों के अलग-अलग और सीमित दायरे में काम करने की संस्कृति को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ करीब चार घंटे तक विभिन्न सुधारात्मक एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में देश के लगभग 80 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकता है, जब सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ एक साझा लक्ष्य को लेकर कार्य करें। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देने के लिए ‘पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ का अधिकतम उपयोग करने पर भी जोर दिया।

क्या होता है ‘ब्यूरोक्रेटिक साइलो’?
‘ब्यूरोक्रेटिक साइलो’ ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें सरकारी विभाग अपने-अपने दायरे में अलग-अलग कार्य करते हैं और एक-दूसरे के साथ पर्याप्त सूचना, संसाधन या योजनाओं का समन्वय नहीं करते। इसके कारण कई परियोजनाओं में देरी, लागत में वृद्धि और संसाधनों का दोहराव देखने को मिलता है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में सड़क बन जाने के बाद पानी की पाइपलाइन या बिजली केबल बिछाने के लिए फिर से खुदाई करनी पड़े, तो यह विभागीय समन्वय की कमी का परिणाम माना जाता है। ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।

क्या है पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान?
पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान केंद्र सरकार की एक डिजिटल और बहु-आयामी योजना है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं की बेहतर योजना, निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

इस प्लेटफॉर्म पर सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली, गैस पाइपलाइन, दूरसंचार नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां एकीकृत रूप में उपलब्ध रहती हैं। इससे परियोजनाओं की योजना अधिक सटीक बनती है और विभिन्न विभाग एक-दूसरे के कार्यों के अनुरूप अपनी योजनाएं तैयार कर सकते हैं।

क्यों जरूरी है यह योजना?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे विशाल देश में बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच प्रभावी समन्वय बेहद जरूरी है। यदि सभी विभाग पहले से साझा योजना के तहत काम करें तो परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी, लागत कम होगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

इसके अलावा उद्योगों को बेहतर परिवहन नेटवर्क, तेज लॉजिस्टिक्स और सुगम कनेक्टिविटी मिलने से व्यापार को भी गति मिलेगी। इससे निवेश बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

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बैठक में सुधारों पर रहा फोकस
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से नवाचार, तकनीक के उपयोग, सेवा वितरण में पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक मंत्रालय केवल अपने विभाग तक सीमित सोचने के बजाय सरकार की समग्र विकास रणनीति के अनुरूप कार्य करे।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन केवल उनके क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए।

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बेहतर समन्वय से मिलेगी विकास परियोजनाओं को रफ्तार
सरकार का मानना है कि यदि सभी मंत्रालय और विभाग ‘पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान’ का प्रभावी उपयोग करते हैं तो विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी, अनावश्यक देरी कम होगी और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने और टीम भावना के साथ कार्य करने का संदेश दिया।

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