Digital India के 11 साल पूरे, इंटरनेट से UPI तक… PM Modi ने बताई बदलाव की कहानी

Digital India @11: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने 1 जुलाई 2026 को अपने 11 वर्ष पूरे कर लिए। वर्ष 2015 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना था। 11 वर्षों की इस यात्रा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया ने देश में शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाओं और नागरिक सुविधाओं तक पहुंच को पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और पारदर्शी बनाया है।

सरकार के अनुसार, डिजिटल इंडिया ने तकनीक के माध्यम से नागरिकों और सरकार के बीच की दूरी कम की है तथा डिजिटल सेवाओं को देश के दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


डिजिटल बदलाव की नई पहचान बना भारत
सरकार का कहना है कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने डिजिटल क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार, सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन होना, डिजिटल भुगतान प्रणाली का तेजी से प्रसार और ई-गवर्नेंस की मजबूती ने आम नागरिकों के जीवन को काफी आसान बनाया है।

डिजिटल इंडिया के तहत नागरिक अब कई सरकारी सेवाओं का लाभ घर बैठे ऑनलाइन उठा रहे हैं। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र, पासपोर्ट सेवाएं, कर भुगतान, छात्रवृत्ति, पेंशन और अनेक अन्य सरकारी सुविधाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

नौ प्रमुख स्तंभों पर आधारित है कार्यक्रम
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को नौ प्रमुख स्तंभों पर विकसित किया गया है। इनमें ब्रॉडबैंड हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार, सार्वजनिक इंटरनेट सुविधाएं, ई-गवर्नेंस, ई-क्रांति, सभी के लिए सूचना तक पहुंच, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा, सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से रोजगार और अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम जैसी पहलें शामिल हैं।

इन पहलों का उद्देश्य डिजिटल सुविधाओं को देश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना और सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा प्रभावी बनाना है।

UPI ने बदल दी डिजिटल भुगतान की तस्वीर
डिजिटल इंडिया अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को माना जाता है। आज देशभर में करोड़ों लोग मोबाइल फोन के माध्यम से कुछ ही सेकंड में डिजिटल भुगतान कर रहे हैं।

छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता भी UPI का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। इससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

ई-गवर्नेंस से बढ़ी पारदर्शिता
डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किए जाने से लंबी कतारों, कागजी कार्रवाई और अनावश्यक देरी में कमी आई है। ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज़, ई-ऑफिस और विभिन्न डिजिटल पोर्टलों के माध्यम से सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी हैं।

सरकार का दावा है कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से सेवा वितरण में तेजी आई है और नागरिकों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक अनुभव मिल रहा है।

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ग्रामीण भारत तक पहुंची डिजिटल क्रांति
डिजिटल इंडिया अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना भी रहा है। पिछले वर्षों में गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के विस्तार और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों लोगों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है।

इससे ग्रामीण नागरिकों को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सेवाओं का लाभ अपने क्षेत्र में ही प्राप्त होने लगा है।

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भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर कदम
सरकार का मानना है कि डिजिटल इंडिया केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए भारत वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में भी तकनीक को सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बनाकर देश के विकास को नई गति दी जाएगी।

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