
Lucknow News: ‘हॉस्टल नहीं, जेल है कॉलेज…’ लखनऊ में MBBS के छात्रों का फूटा गुस्सा
Lucknow News: लखनऊ के बंथरा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्रों ने खराब खाने और कैंपस लॉकडाउन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
Lucknow MBBS Students Protest: राजधानी लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब MBBS के छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोध प्रदर्शन (Protest) शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल की मेस में बेहद घटिया और दूषित खाना (Food Quality) परोसा जा रहा है, जिससे कई छात्रों की तबीयत खराब होने का खतरा बना हुआ है।
इसके साथ ही बिना किसी ठोस वजह के कैंपस को पूरी तरह लॉकडाउन करने और छात्रों की आवाजाही पर पाबंदी लगाने से भी स्टूडेंट्स में भारी आक्रोश है।
हॉस्टल मेस के खाने को लेकर बढ़ा विवाद
प्रदर्शन कर रहे मेडिकल छात्रों का कहना है कि वे कॉलेज को मोटी फीस देते हैं, लेकिन इसके बावजूद हॉस्टल की मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता (Food Quality) बेहद खराब है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी कॉलेज प्रबंधन और वार्डन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
छात्रों का बयान: “हम दिन-रात पढ़ाई करते हैं, लेकिन हमें जो खाना दिया जाता है, वह खाने लायक भी नहीं होता। कई बार भोजन में कीड़े तक पाए गए हैं। शिकायत करने पर हमें ही कॉलेज से सस्पेंड करने की धमकी दी जाती है।”
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पाबंदियों से छात्र परेशान
घटिया भोजन के अलावा, छात्रों के गुस्से की एक बड़ी वजह कॉलेज प्रशासन द्वारा लागू किया गया ‘कैंपस लॉकडाउन’ भी है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें बिना वजह कैंपस से बाहर जाने से रोका जा रहा है और उनके बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। हॉस्टल में जेल जैसी पाबंदियां थोप दी गई हैं, जिससे उनका मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
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प्रशासन और पुलिस बल मौके पर तैनात
कैंपस के भीतर छात्रों के उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय बंथरा थाने की पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस और कॉलेज प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों को समझाने और शांत कराने का प्रयास किया।
हालांकि, छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक मेस का टेंडर नहीं बदला जाता, खाने की क्वालिटी में सुधार नहीं होता और कैंपस लॉकडाउन की मनमानी पाबंदियां नहीं हटाई जातीं, तब तक वे अपना धरना खत्म नहीं करेंगे।
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