EPFO 3.0 में बड़ा बदलाव! अब अधिक वेतन वालों को भी मिल सकती है पेंशन…

EPFO 3.0 Pension Scheme: केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में बड़े सुधारों की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नई अंशदायी पेंशन योजना के जरिए मौजूदा Employees’ Pension Scheme (EPS) के दायरे से बाहर रहने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन सुरक्षा देने की योजना बनाई जा रही है।

केंद्र सरकार EPFO 3.0 सुधारों के तहत देश में पेंशन कवरेज को व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार एक नई अंशदायी यानी Contributory Pension Scheme लाने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित योजना का मकसद उन करोड़ों कर्मचारियों को पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है, जो मौजूदा Employees’ Pension Scheme (EPS) के तहत शामिल नहीं हैं।

सरकार का लक्ष्य एक ऐसा व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवच तैयार करना है, जिसमें नौकरी की प्रकृति और वेतन सीमा के कारण पेंशन से बाहर रह जाने वाले कर्मचारियों को भी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को भी शामिल करने की तैयारी
प्रस्तावित नई योजना में अधिक वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारियों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, जो फिलहाल EPS के दायरे में नहीं आते। इसके अलावा संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी इस पेंशन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।

माना जा रहा है कि EPFO 3.0 के तहत पेंशन व्यवस्था को पारंपरिक नौकरी तक सीमित रखने के बजाय रोजगार के बदलते स्वरूप के अनुरूप बनाया जाएगा। इससे फ्रीलांस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अन्य नए रोजगार मॉडल से जुड़े लोगों को भी भविष्य में पेंशन सुरक्षा का विकल्प मिल सकता है।

Defined Contribution Model पर आधारित होगी योजना
नई पेंशन योजना Defined Contribution Model पर आधारित होगी। इसका मतलब है कि योजना में शामिल प्रत्येक सदस्य के नाम से एक अलग पेंशन खाता बनाया जाएगा।

इस खाते में कर्मचारी और योजना के नियमों के अनुसार जमा होने वाली राशि का रिकॉर्ड रखा जाएगा। जमा धनराशि को सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य दीर्घकालिक सुरक्षित निवेश विकल्पों में लगाया जाएगा। इस निवेश पर मिलने वाला ब्याज हर साल खाते में जोड़ा जाएगा।

यानी कर्मचारी के नाम से बनने वाले पेंशन खाते में समय के साथ योगदान और ब्याज के जरिए एक बड़ा कोष तैयार होगा।

60 साल की उम्र के बाद मिलेगी नियमित पेंशन
प्रस्तावित योजना के तहत सदस्य के 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पेंशन राशि का निर्धारण किया जाएगा। जमा राशि को उस समय उपलब्ध एन्युटी और ब्याज दरों के आधार पर नियमित पेंशन में बदला जाएगा।

इसका मतलब यह है कि कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त रकम के बजाय नियमित आय का विकल्प मिल सकता है। पेंशन की वास्तविक राशि खाते में जमा कुल रकम, निवेश से मिलने वाले रिटर्न और उस समय की एन्युटी दरों पर निर्भर करेगी।

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क्यों जरूरी महसूस हुई नई पेंशन योजना?
देश में रोजगार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अब ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जहां पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का कवरेज सीमित है। इसके अलावा अधिक वेतन पाने वाले कई कर्मचारी भी मौजूदा EPS के दायरे से बाहर रह जाते हैं।

ऐसे में सरकार का मानना है कि पेंशन व्यवस्था को ज्यादा समावेशी बनाने की जरूरत है। EPFO 3.0 के तहत प्रस्तावित योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार का फोकस देश में व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क तैयार करने पर है। नई योजना लागू होने पर संगठित क्षेत्र के साथ-साथ गिग इकॉनमी और अन्य नए रोजगार क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों को भी भविष्य के लिए पेंशन की योजना बनाने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, प्रस्तावित योजना के अंतिम नियम, योगदान की शर्तें और पात्रता से जुड़े प्रावधानों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। लेकिन EPFO 3.0 के तहत नई अंशदायी पेंशन योजना को देश की पेंशन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

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