CJP Protest: छात्रों के भारी विरोध के बावजूद क्यों इस्तीफा नहीं देंगे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान?

नीट पेपर लीक और छात्रों के विरोध के बावजूद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। जानिए सरकार का रुख और इसके पीछे की असली वजह।

Dharmendra Pradhan Resignation: नीट (NEET) परीक्षा में अनियमितता और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सड़कों पर जारी छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उग्र प्रदर्शन के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। विपक्ष और प्रदर्शनकारी लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए उनके इस्तीफे की संभावना को खारिज कर दिया है।

सरकारी सूत्रों और राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस फैसले के पीछे सरकार का एक बड़ा रणनीतिक रुख और प्रशासनिक कारण जिम्मेदार हैं।

नैतिक जिम्मेदारी बनाम सीधा हस्तक्षेप

विपक्ष जहां पूर्व में हुए रेल हादसों या घोटालों के दौरान लाल बहादुर शास्त्री, नीतीश कुमार या शिवराज पाटिल जैसे नेताओं द्वारा दिए गए नैतिक इस्तीफों (Moral Resignations) का हवाला दे रहा है, वहीं सरकार का तर्क है कि एनटीए (NTA) या परीक्षा संचालन में हुई किसी भी गड़बड़ी में मंत्री की व्यक्तिगत भूमिका या सीधी संलिप्तता साबित नहीं हुई है।

सरकार का मानना है कि परीक्षा सुधार के इस मोड़ पर इस्तीफा देने से प्रशासनिक शून्यता (Administrative Void) पैदा होगी, जिससे चल रही सुधार प्रक्रियाओं में देरी आ सकती है।

दबाव में फैसले न लेने’ की सरकार की नीति

केंद्र सरकार की कार्यशैली में अक्सर यह देखा गया है कि वह किसी भी बाहरी या राजनीतिक दबाव के तहत अपने मंत्रियों का इस्तीफा नहीं लेती। अगर सरकार प्रदर्शनकारियों या विपक्ष की इस मांग के आगे झुकती है, तो इससे आंदोलनकारियों को बढ़ावा मिलेगा और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर भी भविष्य में इसी तरह के दबाव की स्थितियां बन सकती हैं।

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सिस्टम रिफॉर्म पर फोकस

सरकार का पूरा ध्यान इस समय व्यक्ति विशेष को हटाने के बजाय व्यवस्था में बदलाव (Systemic Reforms) लाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पेपर लीक विरोधी कड़ा कानून और सख्त दंडात्मक प्रावधान लाने की घोषणा की है। मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन और एनटीए के पुनर्गठन पर काम तेजी से जारी है।

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विपक्ष आक्रामक, सीजेपी की अपनी जिद

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कांग्रेस समेत मुख्य विपक्षी दल इस बात पर अड़े हैं कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सबसे पहला और सख्त कदम शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए संसद में तीखे सवाल उठाए हैं।

सोनम वांगचुक जैसे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी अन्य मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन सीजेपी (CJP) शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अब भी डटी हुई है।

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