
Iran से जंग में अमेरिका के विकल्प खत्म? ट्रंप के शीर्ष जनरल ने सुझाया ‘एग्जिट प्लान’
Iran US War Update: ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर वॉशिंगटन में रणनीतिक मंथन तेज हो गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय इससे बाहर निकलने का रास्ता कैसे तैयार किया जाए। अमेरिकी सैन्य नेतृत्व का आकलन बताया जा रहा है कि उपलब्ध सैन्य विकल्प राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घोषित युद्ध लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो सकते।
जनरल डैन केन ने जताई चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने सैन्य विकल्पों की सीमाओं को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कथित तौर पर संकेत दिया कि संघर्ष को और बढ़ाने वाले कुछ सैन्य कदम अमेरिका के लिए उलटे पड़ सकते हैं।
जनरल केन का आकलन बताया जा रहा है कि केवल अमेरिकी एयरपावर के भरोसे ट्रंप प्रशासन के सभी निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में अमेरिका को सैन्य कार्रवाई बढ़ाने से पहले उसके संभावित परिणामों और जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना होगा।
‘ऑफ-रैंप’ की तलाश क्यों?
अमेरिकी रणनीतिक भाषा में ‘ऑफ-रैंप’ का मतलब संघर्ष से नियंत्रित तरीके से बाहर निकलने का रास्ता होता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य नेतृत्व इसी तरह के विकल्प पर विचार कर रहा है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका ने युद्ध समाप्त करने का फैसला कर लिया है। बल्कि चिंता यह है कि अगर सैन्य अभियान लगातार बढ़ता गया तो अमेरिका ऐसे संघर्ष में फंस सकता है, जिससे बाहर निकलना और मुश्किल हो जाएगा।
आगे सैन्य कार्रवाई से बढ़ सकता है जोखिम
ईरान के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने पर अमेरिका के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ईरान की ओर से जवाबी हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
इसके अलावा संघर्ष के दूसरे मध्य पूर्वी देशों तक फैलने की आशंका भी बनी रहती है। ऐसी स्थिति में अमेरिका को अतिरिक्त सैन्य संसाधन लगाने पड़ सकते हैं और संघर्ष की लागत बढ़ सकती है।
सिर्फ हवाई ताकत से लक्ष्य हासिल करना मुश्किल?
अमेरिका के पास दुनिया की सबसे उन्नत वायु सैन्य क्षमताओं में से एक है। इसके बावजूद ईरान के खिलाफ लंबे सैन्य अभियान में सिर्फ हवाई हमलों पर निर्भर रहना रणनीतिक रूप से पर्याप्त नहीं हो सकता।
ईरान का बड़ा भूगोल, उसकी सैन्य संरचना और क्षेत्रीय प्रभाव अमेरिकी रणनीतिक योजनाकारों के सामने चुनौती पेश करते हैं। किसी भी सैन्य अभियान को लंबे समय तक जारी रखने के लिए बड़ी मात्रा में हथियार, मिसाइल और सैन्य संसाधनों की जरूरत होगी।
अमेरिकी हथियार भंडार पर भी नजर
ईरान के साथ लंबे संघर्ष की स्थिति में अमेरिकी हथियारों और सैन्य संसाधनों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका को दुनिया के अन्य क्षेत्रों में अपनी सैन्य प्रतिबद्धताओं को भी बनाए रखना है।
इसलिए अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के सामने यह सवाल भी है कि ईरान के खिलाफ अभियान में कितने संसाधन लगाए जा सकते हैं, बिना अन्य रणनीतिक मोर्चों को कमजोर किए।
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ट्रंप के सामने बड़ी रणनीतिक चुनौती
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए स्थिति आसान नहीं है। यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई बढ़ाता है तो संघर्ष के विस्तार और अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा बढ़ सकता है। वहीं, अगर वॉशिंगटन बातचीत या युद्ध सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ता है तो ट्रंप के घोषित युद्ध लक्ष्यों पर राजनीतिक सवाल उठ सकते हैं।
यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों के बीच संतुलन तलाशने की कोशिश महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या बातचीत का रास्ता खुलेगा?
सैन्य विकल्पों की सीमाओं के बीच कूटनीति की भूमिका बढ़ सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत का रास्ता तलाशा जा सकता है।
यदि वॉशिंगटन संघर्ष से बाहर निकलना चाहता है, तो उसे ऐसा रास्ता खोजना होगा जिससे अमेरिकी हितों की रक्षा भी हो और ट्रंप प्रशासन इसे राजनीतिक रूप से स्वीकार्य उपलब्धि के रूप में पेश कर सके।
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अभी युद्ध खत्म होने का फैसला नहीं
हालांकि अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के भीतर कथित तौर पर ‘एग्जिट प्लान’ या ‘ऑफ-रैंप’ पर चर्चा हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने का अंतिम फैसला कर लिया है।
फिलहाल संकेत यही हैं कि वॉशिंगटन में युद्ध को आगे बढ़ाने के फायदे और जोखिम का नए सिरे से आकलन किया जा रहा है। अगर सैन्य कार्रवाई से अपेक्षित लक्ष्य हासिल करना मुश्किल माना गया, तो आने वाले समय में कूटनीतिक पहल और संघर्ष को सीमित करने की कोशिशों को ज्यादा महत्व मिल सकता है।
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