मिसाइल हमले घटे, फिर भी जारी है जंग; आखिर कितने दिन टिक सकता है ईरान?

Iran-US War: युद्ध की लागत बढ़ने के बावजूद पीछे हटने के मूड में नहीं ईरान, हथियार उत्पादन और सैन्य कमान की मजबूती पर टिकी रणनीति

Iran: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव में सबसे बड़ा सवाल अब यह बनता जा रहा है कि ईरान कितने समय तक इस जंग को जारी रखने की क्षमता रखता है। ईरान की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, इसके बावजूद उसके नीति निर्माता फिलहाल युद्ध समाप्त करने को लेकर जल्दबाजी में दिखाई नहीं दे रहे हैं।

ईरान की रणनीति का एक अहम हिस्सा यह संदेश देना हो सकता है कि युद्ध की दिशा और उसका अंत केवल अमेरिका तय नहीं कर सकता। तेहरान संभवतः सैन्य कार्रवाई जारी रखकर अमेरिका पर सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाना चाहता है, ताकि भविष्य में बातचीत की स्थिति में अपनी कुछ मांगों को मनवाने की बेहतर स्थिति हासिल कर सके।

हालांकि, इस रणनीति की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान अपने सैन्य संसाधनों और आर्थिक क्षमता को कितने समय तक बनाए रख सकता है।

मिसाइल भंडार को लेकर तस्वीर साफ नहीं
ईरान की सैन्य क्षमता का आकलन करना आसान नहीं है। संघर्ष के दौरान ईरान की डिफेंस इंडस्ट्री और मिसाइल उत्पादन से जुड़ी कुछ सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, इन हमलों से कितना नुकसान हुआ है, इसका स्वतंत्र और विश्वसनीय आकलन उपलब्ध नहीं है।

चैटम हाउस के ताजा आकलन के मुताबिक, ईरान के पास मौजूद मिसाइलों के मौजूदा भंडार को लेकर कोई भरोसेमंद आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में केवल उपलब्ध मिसाइलों की अनुमानित संख्या के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि तेहरान कितने समय तक बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान जारी रख सकता है।

मिसाइल हमलों में कमी, लेकिन क्षमता खत्म नहीं
समय बीतने के साथ ईरान की ओर से दागी जाने वाली मिसाइलों की संख्या में कमी देखने को मिली है। पहली नजर में इसे ईरान के हथियार भंडार पर पड़ते दबाव के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को केवल बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या से आंकना सही नहीं होगा।

ईरान के पास ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों का विकल्प भी मौजूद है। इन हथियारों का उत्पादन अपेक्षाकृत आसान और तेज माना जाता है। इससे ईरान को लंबे समय तक कम लागत वाले हमलों को जारी रखने का विकल्प मिल सकता है।

कमांडरों की जगह नए नेतृत्व ने संभाली जिम्मेदारी
युद्ध में ईरान को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद उसके सैन्य ढांचे में नए कमांडरों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसका मतलब है कि नेतृत्व को पूरी तरह निष्क्रिय करने की कोशिशों के बावजूद कमान और नियंत्रण की व्यवस्था अभी भी काम कर रही है।

यही कारण है कि ईरान की युद्ध जारी रखने की क्षमता का आकलन केवल उसके हथियारों के भंडार से नहीं किया जा सकता। सैन्य नेतृत्व, ड्रोन उत्पादन, क्रूज़ मिसाइल क्षमता, औद्योगिक ढांचा और कम लागत वाले हमलों की क्षमता भी उसकी रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

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असली चुनौती अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा
लंबे समय तक युद्ध जारी रखने में ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल हथियारों की उपलब्धता नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव भी हो सकता है। लगातार सैन्य खर्च, ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे पर हमले तथा आपूर्ति व्यवस्था में व्यवधान लंबे समय में तेहरान की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसे में ईरान के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे सैन्य दबाव बनाए रखना है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था और जरूरी सेवाओं को भी चलाते रहना होगा।

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युद्ध का अंत कब होगा, यह कई कारकों पर निर्भर
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि ईरान किसी निश्चित अवधि तक युद्ध जारी रख सकता है। उसकी क्षमता का आकलन करने के लिए उसके मिसाइल और ड्रोन भंडार, उत्पादन क्षमता, सैन्य नेतृत्व, आर्थिक स्थिति और बुनियादी ढांचे को एक साथ देखना होगा।

ईरान की रणनीति संभवतः युद्ध को इतना लंबा खींचने की है कि अमेरिका पर भी लागत और राजनीतिक दबाव बढ़े। लेकिन दूसरी ओर, यदि ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता लगातार कमजोर होती गई तो लंबे संघर्ष का दबाव तेहरान के लिए भी बढ़ता जाएगा।

इसलिए आने वाले समय में सबसे अहम सवाल केवल यह नहीं होगा कि ईरान के पास कितनी मिसाइलें बची हैं, बल्कि यह होगा कि वह कितनी तेजी से नए हथियार बना सकता है, अपनी कमान व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाए रख सकता है और युद्ध के आर्थिक दबाव को कितने समय तक सह सकता है।

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