
बोतलों में पेशाब और हर तरफ बदबू…, कांवड़ यात्रा के बाद हरिद्वार में फैला 7000 टन कचरा
कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बाद हरिद्वार में करीब 7,000 मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। गंगा घाटों और कांवड़ पटरी को साफ करने के लिए नगर निगम ने महासफाई अभियान शुरू किया है।
Haridwar Kanwar Yatra: कांवड़ मेला 2026 के संपन्न होते ही अब देवभूमि हरिद्वार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पिछले 13 दिनों के दौरान रिकॉर्ड 4 करोड़ 80 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के चलते हरिद्वार के प्रमुख गंगा घाटों, मेला क्षेत्र और कांवड़ पटरी पर करीब 7,000 मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। इसमें यूरिन से भरी बोतल, प्लास्टिक शीट, फेंके गए कपड़े और कई अन्य चीजें शामिल हैं।
कांवड़ मेला समाप्त होते ही जिला प्रशासन और हरिद्वार नगर निगम ने पूरे शहर और गंगा घाटों को साफ-सुथरा बनाने के लिए व्यापक स्तर पर ‘महासफाई अभियान’ (Mega Cleanliness Drive) शुरू कर दिया है।
1,000 से ज्यादा सफाई कर्मचारी तैनात
गंगा के पवित्र तटों और शहर की सड़कों को जल्द से जल्द पूर्व स्थिति में लाने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी ताकत से जुट गया है। नगर निगम, जिला पंचायत और परिवहन विभाग के 1,000 से अधिक कर्मचारी दिन-रात सफाई में लगे हुए हैं।
हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, बिरला घाट, नई घाट और अलकनंदा समेत करीब 95% प्रमुख घाटों से कचरा हटा लिया गया है। घाटों और संकरी गलियों से कचरा उठाने के लिए जेसीबी मशीनों और 80 से अधिक बड़े ट्रकों का सहारा लिया जा रहा है।
कचरों का होगा साइंटिफिक रीसाइक्लिंग
नगर आयुक्त नंदन कुमार के अनुसार, कुल एकत्रित कचरे में से लगभग 4,000 से 4,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरा केवल कांवड़ यात्रा की वजह से जमा हुआ है, जिसमें पुराने कपड़े, प्लास्टिक शीट, पॉलीथिन, जूते-चप्पल और डिस्पोजल सामग्री शामिल हैं।
इस बार प्लास्टिक और कपड़ों को अलग-अलग करने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। एकत्र किए गए कचरे को सराय स्थित प्रोसेसिंग प्लांट और एमआरएफ (MRF) सेंटर भेजा जा रहा है। श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए फटे और पुराने कपड़ों को टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग प्रोजेक्ट्स के तहत प्रोसेस किया जाएगा।
नागरिक भी करें सहयोग
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और पुलिस-प्रशासन ने सभी विभागों को 12 अगस्त से 18 अगस्त तक चलने वाले इस सफाई अभियान को गति देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) से भी मां गंगा के तटों को स्वच्छ और निर्मल बनाने के इस अभियान में सहयोग देने की अपील की गई है।





