35 साल बाद भी मां का दर्द नहीं भूले राहुल, सोनिया की आत्मकथा पर छलका भाव

सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ नवंबर में होगी प्रकाशित, राहुल गांधी ने मां के संघर्ष, राजीव गांधी की याद और राजनीति में उनके सफर को याद करते हुए साझा किया भावुक संदेश.

Sonia Gandhi Autobiography: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ नवंबर 2026 में प्रकाशित होने जा रही है। किताब के आने से पहले राहुल गांधी ने अपनी मां के संघर्ष, निजी जीवन और साहस को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी मां की कहानी उन करोड़ों लोगों तक पहुंचेगी, जो उनसे प्यार करते हैं।

सोनिया गांधी की किताब को लेकर राहुल ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने कहा कि उनकी मां सोनिया गांधी ने अपने निजी जीवन को हमेशा सार्वजनिक नजरों से दूर रखा है। ऐसे में अपनी जिंदगी की कहानी दुनिया के सामने रखना उनके लिए आसान नहीं रहा होगा। राहुल ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी मां की कहानी अब उन करोड़ों लोगों तक पहुंचेगी, जो उन्हें प्यार और सम्मान देते हैं।

राहुल गांधी ने अपनी मां के जीवन के संघर्षों को याद करते हुए राजीव गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनके पिता आज इस किताब को देखकर मुस्कुरा रहे होंगे।

नवंबर में प्रकाशित होगी सोनिया गांधी की आत्मकथा
सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ नवंबर 2026 में प्रकाशित होने वाली है। इस किताब में सोनिया गांधी अपने बचपन से लेकर गांधी परिवार में प्रवेश और भारतीय राजनीति में अपने लंबे सफर तक के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा करेंगी।

किताब में उनके इटली के बचपन, राजीव गांधी से मुलाकात, प्रेम और विवाह के साथ गांधी परिवार में आने के अनुभवों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा इंदिरा गांधी और संजय गांधी की मौत जैसे बेहद कठिन दौर को भी सोनिया गांधी अपनी नजर से सामने रखेंगी।

राजीव गांधी की हत्या के बाद बदली जिंदगी
सोनिया गांधी की जिंदगी का सबसे बड़ा और दर्दनाक मोड़ 1991 में राजीव गांधी की हत्या थी। इस त्रासदी ने उन्हें राजनीति की सार्वजनिक दुनिया के करीब ला दिया। आत्मकथा में वह इस घटना और उसके बाद के जीवन के अनुभवों को भी साझा करेंगी।

इसके अलावा किताब में सोनिया गांधी के राजनीति में आने के कारणों और कांग्रेस की राजनीति में उनकी भूमिका से जुड़े कई पहलुओं के सामने आने की उम्मीद है।

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2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का भी जिक्र
सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय 2004 का है। कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) को बहुमत मिलने के बाद सोनिया गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे आगे था। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया।

अपनी आत्मकथा में सोनिया गांधी इस फैसले और उससे जुड़े घटनाक्रम पर भी अपनी बात रखेंगी। इससे पाठकों को उस दौर की राजनीति और उनके व्यक्तिगत फैसलों को समझने का मौका मिलेगा।

छह दशकों के भारत की कहानी भी दिखेगी
‘Belonging: A Journey of Love’ सिर्फ सोनिया गांधी की व्यक्तिगत कहानी तक सीमित नहीं होगी। किताब के जरिए पिछले करीब छह दशकों में भारत में आए सामाजिक और आर्थिक बदलावों को भी उनके निजी अनुभवों के माध्यम से समझने का प्रयास किया जाएगा।

सोनिया गांधी के बचपन से लेकर भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में शामिल होने और फिर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने तक का सफर इस आत्मकथा का अहम हिस्सा होगा।

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राहुल गांधी ने मां के साहस को किया सलाम
सोनिया गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन से पहले राहुल गांधी का भावुक संदेश इस किताब को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा रहा है। उन्होंने अपनी मां के निजी जीवन को सार्वजनिक करने के फैसले को साहसिक कदम बताया और कहा कि उनकी कहानी को दुनिया तक पहुंचते देखना उनके लिए गर्व की बात है।

नवंबर में किताब के प्रकाशित होने के बाद सोनिया गांधी के जीवन से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आने की संभावना है, जिन पर उन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से विस्तार से बात नहीं की है।

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