
क्या डूब रही है दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था? अमेरिका का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर पार…
बढ़ता सरकारी कर्ज, भारी ब्याज और रक्षा खर्च बना चुनौती, जानिए क्या सच में दिवालिया होने की ओर बढ़ रहा अमेरिका
US Debt Crisis: अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। यह निश्चित रूप से एक बड़ा वित्तीय रिकॉर्ड है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका दिवालिया होने की कगार पर है। असली चिंता लगातार बढ़ता बजट घाटा, कर्ज पर बढ़ता ब्याज और भविष्य में बढ़ने वाला सरकारी खर्च है। इसी बीच ईरान के साथ जारी युद्ध ने अमेरिकी रक्षा खर्च और राजकोषीय दबाव को और बढ़ा दिया है।
40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज क्यों बढ़ा चिंता?
अमेरिकी सरकार लंबे समय से अपनी आय से अधिक खर्च करती रही है। जब सरकार का खर्च उसकी टैक्स और दूसरी आय से ज्यादा हो जाता है तो बजट घाटा पैदा होता है। इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ट्रेजरी बॉन्ड और दूसरी प्रतिभूतियों के जरिए कर्ज लेती है।
कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में अमेरिकी बजट घाटा करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। मौजूदा कानूनों के आधार पर यह घाटा 2036 तक बढ़कर करीब 3.1 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है।
असली दबाव ब्याज के बढ़ते बिल से
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चिंता केवल कर्ज की कुल रकम नहीं, बल्कि उस कर्ज पर चुकाया जाने वाला ब्याज भी है। CBO के अनुमान के मुताबिक 2026 में अमेरिकी सरकार का नेट ब्याज खर्च 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है। 2036 तक यह बढ़कर करीब 2.1 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है।
इसका मतलब है कि सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ पुराने कर्ज की सर्विसिंग में खर्च होता जाएगा। यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं और सरकार लगातार नया कर्ज लेती रहती है, तो यह दबाव और बढ़ सकता है।
क्या अमेरिका की अर्थव्यवस्था कर्ज से छोटी हो गई है?
कर्ज और GDP की तुलना करते समय यह देखना जरूरी है कि किस तरह के कर्ज की बात हो रही है। CBO के मुताबिक 2026 में जनता के पास मौजूद संघीय कर्ज (debt held by the public) GDP के लगभग 101 प्रतिशत के बराबर रहने का अनुमान है और 2036 तक यह 120 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
वहीं, अमेरिका की अर्थव्यवस्था अभी भी बढ़ रही है। अमेरिकी BEA के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2026 की दूसरी तिमाही में वास्तविक GDP की वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत वार्षिक दर रही। इसलिए सिर्फ कर्ज का 40 ट्रिलियन डॉलर पार करना यह साबित नहीं करता कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ढह रही है।
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ईरान युद्ध ने बढ़ाया वित्तीय दबाव
अमेरिका के बढ़ते कर्ज की शुरुआत ईरान युद्ध से नहीं हुई है। महामारी के दौरान भारी सरकारी खर्च, लंबे समय से चले आ रहे बजट घाटे, टैक्स और खर्च से जुड़े फैसले तथा सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर बढ़ता खर्च इसके पीछे बड़े कारण हैं।
लेकिन ईरान के साथ जारी युद्ध ने अतिरिक्त दबाव जरूर पैदा किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई 2026 में सांसदों को बताया था कि ईरान युद्ध की लागत तब तक करीब 37.5 अरब डॉलर पहुंच चुकी थी। प्रशासन ने आगे के सैन्य अभियान के लिए करीब 90 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग भी मांगी थी।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि युद्ध अमेरिकी कर्ज संकट का मूल कारण नहीं है, लेकिन यह पहले से दबाव में मौजूद अमेरिकी बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और तेल का असर
ईरान संघर्ष का एक दूसरा आर्थिक असर तेल बाजार के जरिए सामने आता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने पर वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर दबाव आ सकता है।
अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में तेजी से कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ऊंची ब्याज दरें सरकार के नए कर्ज और पुराने कर्ज के पुनर्वित्त की लागत पर भी असर डाल सकती हैं।
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क्या अमेरिका दिवालिया हो सकता है?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। 40 ट्रिलियन डॉलर का राष्ट्रीय कर्ज बेहद गंभीर राजकोषीय चुनौती जरूर है, लेकिन यह अपने आप में अमेरिका के दिवालिया होने का प्रमाण नहीं है।
अमेरिका के सामने असली चुनौती यह है कि वह लगातार बढ़ते घाटे और ब्याज खर्च को किस तरह नियंत्रित करता है। CBO ने भी अमेरिकी राजकोषीय स्थिति को लंबे समय में अस्थिर (unsustainable) बताया है और अनुमान लगाया है कि मौजूदा नीतियों के तहत कर्ज GDP की तुलना में लगातार बढ़ता रहेगा।
इसलिए सवाल यह नहीं है कि अमेरिका कल दिवालिया हो जाएगा या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बढ़ते कर्ज, ब्याज खर्च और रक्षा जरूरतों के बीच अपने वित्तीय संतुलन को कितनी जल्दी सुधार पाती है।
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