
आखिर किस हैसियत से निर्देश दे रहे हैं चंपत राय?
मंदिर में चंपत की दखलंदाजी अब भी बरकरार
बन्द कमरे में पूर्व महासचिव चंपत राय ने की गुफ्तगू
अयोध्या। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि रस्सी जल गई पर ऐंठन नही गई। तभी तो बन्द कमरे में पूर्व महासचिव चंपत राय गुफ्तगू कर रहे हैं। आखिर किस हैसियत से निर्देश दे रहे हैं? अयोध्या मे श्री राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी किए जाने की घटना के करीब ढाई महीने बाद पूर्व महासचिव चंपत राय फिर मंदिर परिसर पहुंचे। पद से विदाई और ट्रस्ट की नई टीम के गठन के बाद पहली बार मंदिर परिसर में उनकी इस तरह सक्रिय मौजूदगी सामने आई। चंपत राय ने ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्र के साथ यात्री सेवा केंद्र पहुंचकर यहां तैनात 12 से अधिक कर्मचारियों के साथ करीब तीन घंटे तक बंद कमरे में व्यवस्थाओं पर चर्चा की।
इसके बाद दोनों ने यात्री सेवा केंद्र, दर्शन मार्ग और निकास मार्ग के आसपास सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर 34 सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए। मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी चोरी की घटना के बाद व्यवस्थाओं में बदलाव और निगरानी बढ़ाने को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। इसी बीच चंपत राय का अचानक मंदिर परिसर पहुंचना और कर्मचारियों के साथ लंबी चर्चा करना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, ट्रस्ट में उनका औपचारिक पद अब नहीं है, लेकिन उनकी गतिविधि से साफ है कि मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर उनका अनुभव अब भी अहम माना जा रहा है।





