
ईरान-अमेरिका युद्ध पर बड़ा दावा, ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक जारी रह सकता है संघर्ष
Iran-US War: ईरान-अमेरिका संघर्ष के जल्द खत्म होने के बजाय लंबे खिंचने के संकेत, अमेरिकी अधिकारियों के बीच 2029 तक युद्ध जारी रहने की संभावना पर चर्चा; होर्मुज स्ट्रेट और तेल बाजार पर बढ़ी चिंता।
US Iran War Update: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं रह गया है कि युद्ध कब खत्म होगा, बल्कि यह है कि क्या यह लंबे समय तक चलने वाले क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। अमेरिकी मीडिया में ऐसी आशंकाएं सामने आई हैं कि मौजूदा तनाव का असर आने वाले कई वर्षों तक बना रह सकता है और इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी बड़ा दबाव पड़ सकता है।
Trump के कार्यकाल तक जारी रह सकता है संघर्ष?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने निजी बातचीत में इस संभावना पर चर्चा की है कि ईरान के साथ संघर्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंत तक जारी रह सकता है। ट्रंप का कार्यकाल 2029 तक है।
यह आकलन राष्ट्रपति ट्रंप के उन बयानों से अलग तस्वीर पेश करता है, जिनमें वह कई बार युद्ध के जल्द खत्म होने की संभावना जता चुके हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद यह संघर्ष समाप्त हो सकता है।
मध्यावधि चुनाव को लेकर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया है कि ईरान अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, तेहरान चाहता है कि कांग्रेस में ऐसे लोग चुनकर आएं, जिनका ईरान के प्रति रुख अपेक्षाकृत नरम हो।
हालांकि, संघर्ष के लंबे खिंचने की आशंका अमेरिकी प्रशासन के सामने एक अलग चुनौती पेश कर रही है। यदि युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो इसका असर अमेरिकी विदेश नीति के साथ-साथ पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी दुनिया की नजर
ईरान-अमेरिका संघर्ष में फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील इलाकों में बने हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमलों और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी मिसाइल हमलों को भी प्रमुखता दी गई है।
अमेरिकी युद्धपोत पर हमले के दावे पर अलग-अलग बयान
ईरानी सैन्य अधिकारियों की ओर से दक्षिणी ईरानी जलक्षेत्र में अमेरिकी बेड़े पर हमला करने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी अमेरिकी युद्धपोत को निशाना नहीं बनाया गया।
ऐसे विरोधाभासी दावों के बीच क्षेत्र में तनाव और सैन्य टकराव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है बड़ा असर
यदि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है। फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की बड़ी बाधा से कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि अमेरिकी मीडिया में अब युद्ध के तत्काल अंत के बजाय इस बात पर ज्यादा चर्चा हो रही है कि कहीं यह संघर्ष लंबे समय तक चलने वाले क्षेत्रीय युद्ध में तो नहीं बदल रहा।
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