
‘पद ताकत नहीं, जिम्मेदारी है’, CM योगी ने लोक सेवकों को दिलाई संविधान की भावना
CM Yogi Statement: CM योगी ने लोक सेवकों को दिलाई संवैधानिक मर्यादा की याद, बोले- अधिकार के साथ जिम्मेदारी का भी होना चाहिए एहसास
UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक सेवकों की भूमिका, जिम्मेदारी और संवैधानिक मर्यादा को लेकर बड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ताकत और अधिकार मिलने के बाद लोक सेवकों को उद्दंड नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी जिम्मेदारी और मर्यादा का एहसास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान के निर्माण के पीछे भी इसके निर्माताओं की यही भावना थी कि शासन व्यवस्था में अधिकारों के साथ कर्तव्य और जवाबदेही का भाव बना रहे।
अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
सीएम योगी ने कहा कि किसी भी लोक सेवक को मिलने वाली शक्ति व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि जनता की सेवा का माध्यम है। पद और अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी आती है। इसलिए अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने आचरण में संयम, अनुशासन और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी व्यवस्था में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि वह जनता के प्रति जवाबदेह है। आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान और न्याय की उम्मीद लेकर सरकारी संस्थानों तक पहुंचता है। ऐसे में लोक सेवकों का व्यवहार और कार्यशैली लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के भरोसे को मजबूत करने वाली होनी चाहिए।
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संविधान की मूल भावना का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में संविधान निर्माण की भावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं की सोच में शासन व्यवस्था को जनता की सेवा से जोड़ने का भाव था। संविधान ने शासन करने वाली संस्थाओं और लोक सेवकों के लिए अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों की भी व्यवस्था की है।
सीएम योगी के मुताबिक, संवैधानिक व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी शासन प्रणाली स्थापित करना है, जिसमें शक्ति का इस्तेमाल जनहित में हो और किसी भी स्तर पर अधिकार का दुरुपयोग न हो।
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‘पद सेवा का माध्यम, विशेषाधिकार का नहीं’
मुख्यमंत्री के संदेश का केंद्र यही रहा कि लोक सेवा का पद किसी व्यक्ति के लिए विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जनता की सेवा की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अधिकार मिलने के बाद व्यक्ति के आचरण में विनम्रता और जिम्मेदारी का भाव और अधिक दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने लोक सेवकों से संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक मर्यादाओं का पालन करते हुए काम करने की अपेक्षा जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की विश्वसनीयता तभी मजबूत होती है, जब जनता को प्रशासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही दिखाई दे।
सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब सरकारी व्यवस्था में अधिकारियों और कर्मचारियों के आचरण तथा जनता के प्रति उनकी जवाबदेही को लेकर लगातार चर्चा होती रहती है।
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