OTT पर सेंसरशिप के लिए RSS ने बनाया पैनल, फिल्मों की तरह सर्टिफिकेशन की मांग

RSS OTT Censorship Panel: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने OTT प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जा रहे कंटेंट को नियंत्रित करने और इस पर निगरानी रखने के लिए एक अनौपचारिक एक्सपर्ट पैनल का गठन किया है। संघ का मानना है कि ओटीटी पर परोसा जा रहा कुछ कंटेंट समाज में ‘सांस्कृतिक प्रदूषण’ और नैतिक गिरावट फैला रहा है।

यह पैनल ओटीटी कंटेंट के सर्टिफिकेशन और रेगुलेशन के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड जैसी एक संस्था या कानूनी ढांचा तैयार करने के संबंध में केंद्र सरकार को अपने महत्वपूर्ण सुझाव और सिफारिशें सौंपेगा।

कानूनी विशेषज्ञों से होगी चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा गठित इस पैनल में शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ शिक्षाविद, पूर्व विश्वविद्यालय कुलपति (Vice-Chancellors) और संघ के प्रचारक शामिल हैं। इस एक्सपर्ट ग्रुप की पहली अनौपचारिक बैठक भी आयोजित की जा चुकी है।

यह पैनल अपनी सिफारिशों और रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले देश के जाने-माने कानूनी विशेषज्ञों से गहन परामर्श करेगा ताकि ओटीटी के लिए प्रस्तावित नियमों को संवैधानिक और कानूनी दायरे में मजबूती दी जा सके।

कुटुंब प्रबोधन के फीडबैक पर कदम

यह कदम संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा पूर्व में विजयादशमी संबोधन के दौरान जताई गई चिंताओं के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री के कानूनी नियमन (Legal Regulation) की आवश्यकता पर बल दिया था।

इसके अलावा आरएसएस की शाखा ‘कुटुंब प्रबोधन’ (जो पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने का काम करती है) से मिले फीडबैक में भी ओटीटी कंटेंट को युवाओं और परिवारों के लिए हानिकारक बताया गया था। इसी सामाजिक प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए संघ ने नीतिगत स्तर पर सुझाव तैयार करने की पहल की है।

ये भी पढ़े-Bigg Boss 20: आपस में भिड़ीं माही विज और आम्रपाली दुबे, जमकर हुआ बवाल

सेंसर बोर्ड की आवश्यकता पर जोर

वर्तमान में भारत में थिएटर्स में रिलीज होने वाली फिल्मों को ‘सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952’ के तहत सीबीएफसी (सेंसर बोर्ड) से प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है, जबकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जाने वाले कंटेंट के लिए ऐसी कोई पूर्व-रिलीज सर्टिफिकेशन व्यवस्था नहीं है।

डिजिटल स्ट्रीमिंग सेवाएं मुख्य रूप से ‘आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021’ के तहत संचालित होती हैं। आरएसएस के इस पैनल द्वारा तैयार ड्राफ्ट प्रस्ताव को आने वाले समय में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को सौंपा जाएगा।

ये भी पढ़े-अमिताभ बच्चन ने रिटायरमेंट पर कसा तंज, ब्लॉग की व्याख्या पर भी कोसा…

Back to top button