
NTA दफ्तर जा सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के जज, कहा- ‘खुद चेक करेंगे सिस्टम’
Supreme Court NEET NTA: सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 परीक्षा लीक और NTA सुधारों से जुड़ी याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सूचित किया कि इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली उच्चस्तरीय समिति ने सभी हितधारकों से गहन विचार-विमर्श पूरा कर लिया है और चालू महीने के अंत तक अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीठ खुद यह देखने के लिए NTA के ऑफिस जा सकती है कि वहां बनाया गया सिस्टम असल में काम कर रहा है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र का वक्तव्य
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं और विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सभी सुझावों को नीलेकणि समिति के सामने रखा गया था। इस समिति ने पूर्व इसरो अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पिछली समिति के सदस्यों के साथ भी विस्तृत चर्चा की है ताकि नीट परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।
परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने पर जोर
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार नीट आयोजित करने वाली पूरी व्यवस्था के स्थायीकरण पर ध्यान दे। अदालत ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में एक स्थायी ढांचा, स्थायी कर्मचारी और विशेषज्ञ होने चाहिए तथा प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर निर्भरता बेहद कम होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक स्थायी मानव संसाधन और व्यवस्था नहीं होगी, तब तक प्रणाली में संस्थागत मजबूती नहीं आ सकती।
NTA का दौरा कर सकती है SC
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी इच्छा जताई कि न्यायमूर्ति नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अराधे दिल्ली के मिंटो रोड स्थित एनटीए के नए अपग्रेटेड फैसिलिटी सेंटर का व्यक्तिगत रूप से दौरा कर व्यवस्था का जायजा ले सकते हैं। शिक्षा विभाग ने अदालत को बताया है कि एनटीए के मुख्यालय को 55,000 वर्ग फुट से अधिक की एक नई और सुरक्षित सरकारी इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसकी सुरक्षा सीआईएसएफ (CISF) के जवानों के हवाले है।
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प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के उस संयुक्त सचिव को दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जो नीलेकणि समिति के साथ समन्वय कर रहे हैं। अदालत ने कहा है कि इस हलफनामे में समिति द्वारा अब तक की गई प्रगति और उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अदालत ने एनटीए को अपने सभी सुधार संबंधी सुधार पत्रों को आधिकारिक वेब पोर्टल पर सार्वजनिक करने का आदेश दिया है।
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