
बरसाने के सेठ की बेटी हैं राधा रानी, अदृश्य होकर पहनीं मनिहारिन की चूड़ियां
Radha ashtami 2026: राधा अष्टमी का पावन पर्व इस साल 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा, मंत्र जाप, भजन, ध्यान और दान-पुण्य करने की विशेष परंपरा है। वहीं कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं। इस पर्व की खास रौनक बरसाना और वृंदावन में देखने को मिलती है। इस पर्व की मुख्य पूजा मध्याह्नकाल में की जाती है। इस पर्व को राधा जयन्ती के नाम से भी जाना जाता है।
इस पर्व को लेकर बरसाने में एक कथा प्रचलित है आइए जानते है?
भावुक कर देने वाली अलौकिक कथा
पावन धाम बरसाने में एक प्रतिष्ठित सेठ जी रहते थे। उनके पास धन-दौलत, तीन आज्ञाकारी बेटों और बहुओं से भरा-पूरा परिवार था, लेकिन मन में एक बेटी न होने की टीस हमेशा बनी रहती थी। एक बार संतों के दर्शन होने पर उन्होंने अपना यह दुख व्यक्त किया।
संतों ने उन्हें सलाह दी कि जब मन में किसी सांसारिक वस्तु का अभाव हो, तो उस पर भगवान का भाव स्थापित कर लेना चाहिए। संतों की बात मानकर सेठ जी ने श्रीराधा रानी का सुंदर चित्र अपने शयनकक्ष में लगाया और उन्हें अपनी बेटी मानकर रोजाना लाड लड़ाने लगे।
मनिहारिन का आगमन
एक दिन दोपहर के समय एक मनिहारिन रंग-बिरंगी चूड़ियां लेकर सेठ जी के घर पहुंची। आवाज सुनकर घर की तीनों बहुएं बाहर आईं और उन्होंने सुंदर चूड़ियां पहन लीं। इसी दौरान ओट में से एक और सुकुमार हाथ आगे बढ़ा, जिसे घर की कोई बेटी या मेहमान समझकर मनिहारिन ने प्यार से हरी चूड़ियां पहना दीं।
शाम को जब मनिहारिन चार लोगों की चूड़ियों का हिसाब करने सेठ जी की दुकान पर पहुंची, तो सेठ जी ने यह कहकर मना कर दिया कि उनके घर में केवल तीन बहुएं हैं और वे जांच करने के बाद ही चौथे व्यक्ति के पैसे देंगे।
स्वप्न में राधा जी के आंसू
रात में जब सेठ जी सो रहे थे, तब श्रीराधा रानी उदास चेहरे के साथ उनके स्वप्न में प्रकट हुईं। उन्होंने भर आए कंठ से कहा कि आपने मुझे बेटी तो माना, लेकिन पिता का नाता पूरी तरह नहीं निभाया। उन्होंने कहा कि अपने पिता का घर समझकर मैं चूड़ियां पहनने आई थी, लेकिन आपने तीन बहुओं को याद रखा और अपनी इस बेटी को भूल गए।
चार चूड़ियों के पैसों के लिए आपने मुझे पराया समझ लिया। इतना कहते ही श्रीराधा रानी की आंखों से अश्रुधारा बह निकली और यह अलौकिक दृश्य देखकर सेठ जी की नींद टूट गई।
मनिहारिन के घर पहुंचे सेठ
सुबह होते ही पश्चाताप और भक्तिभाव से भरे सेठ जी सीधे उस गरीब मनिहारिन के घर पहुंचे। मनिहारिन के फूस के मकान के सामने पहुंचकर सेठ जी ने उसकी चरणों की धूल सिर पर लगाई और गद्गद कंठ से कहा कि इस संसार में तुमसे बड़ा भाग्यशाली कोई नहीं है।
जिस जगज्जननी श्रीराधा रानी को पाने के लिए ऋषि-मुनि युगों तक तपस्या करते हैं, उन्होंने स्वयं तुमसे चूड़ियां पहनी हैं। सेठ जी ने मनिहारिन को चूड़ियों की कीमत चुकाई और जीवन भर के लिए राधा रानी के अनन्य प्रेम में लीन हो गए।
व्रत और पूजा का मुहूर्त
राधा अष्टमी की मुख्य पूजा मध्याह्नकाल में संपन्न की जाती है। इस व्रत की खास बात यह है कि साधक दोपहर तक ही उपवास रखते हैं। मध्याह्नकाल में राधा रानी का विधिवत पूजन करने, उन्हें प्रिय व्यंजनों का भोग लगाने और आरती करने के पश्चात श्रद्धालु अपना व्रत खोलते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भक्तिभाव से पूजा और व्रत करने से साधक के जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।





