
चुनाव करीब आते ही बदला सियासी रंग, कथा-पूजा में जुटे यूपी के नेता…
UP Election 2027 : विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों की बढ़ी सक्रियता, सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेता कथा और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच बना रहे संपर्क
Lucknow: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। चुनाव से करीब पांच से छह महीने पहले प्रदेश की राजनीति में धार्मिक आयोजनों की सक्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। बीजेपी समेत अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता भागवत कथा, शिव पुराण कथा, राम कथा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। कई जगहों पर नेताओं की ओर से इन कार्यक्रमों का आयोजन भी कराया जा रहा है।
चुनाव से पहले भगवान की शरण में नेता
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की अपनी अलग भूमिका रही है। इस बार भी विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं की धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़ती मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों के नेता भी अपने-अपने क्षेत्रों में धार्मिक आयोजनों से जुड़ रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल होते हैं। ऐसे में धार्मिक आयोजनों के जरिए नेताओं को जनता के बीच सीधे पहुंचने का अवसर भी मिलता है। हालांकि, आयोजकों की ओर से इन कार्यक्रमों को मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और सामाजिक आयोजन के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
ऊंचाहार में शिव पुराण कथा का आयोजन
हाल ही में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने रायबरेली जिले के अपने विधानसभा क्षेत्र ऊंचाहार में शिव पुराण कथा का आयोजन कराया। इस कथा में मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने प्रवचन किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री और बीजेपी के अन्य नेता मौजूद रहे।
बड़े स्तर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। चुनाव से कुछ महीने पहले एक विधानसभा क्षेत्र में इतने बड़े धार्मिक आयोजन और उसमें कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को बढ़ा दिया।
भागवत कथा से राम कथा तक, बढ़ी धार्मिक गतिविधियां
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भागवत कथा, राम कथा, शिव पुराण और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़े राजनीतिक नेताओं की भी मौजूदगी दिखाई दे रही है।
धार्मिक आयोजनों में नेताओं की भागीदारी को एक तरफ आस्था और सामाजिक जुड़ाव से जोड़ा जा रहा है, तो दूसरी तरफ चुनाव से पहले बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें…
UP News: डबल मर्डर से दहला जौनपुर, भाई ने मां-बहन को कुल्हाड़ी से काटा
विपक्षी नेता भी धार्मिक आयोजनों से नहीं दूर
धार्मिक आयोजनों में केवल बीजेपी के नेताओं की सक्रियता नहीं है। विपक्षी दलों के नेता भी अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए नेता अपने विधानसभा क्षेत्रों और स्थानीय लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में धार्मिक कार्यक्रमों की व्यापक सामाजिक पहुंच को देखते हुए चुनाव से पहले इनकी राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
यह भी पढ़ें…
लखनऊ में LDA बनाएगा लग्जरी अपार्टमेंट, जल्द शुरू होगी बुकिंग
क्या चुनाव से पहले धार्मिक आयोजनों का बढ़ेगा असर?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक दलों का जनसंपर्क अभियान और तेज होने की संभावना है। ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नेताओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है।
फिलहाल ऊंचाहार में आयोजित शिव पुराण कथा ने उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में धार्मिक आयोजनों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि चुनावी माहौल में राजनीतिक दल धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के जरिए किस तरह जनता तक पहुंच बनाते हैं।
यह भी पढ़ें…





