इंदिरा गांधी भी नहीं बचीं, फिर BJP पर एंटी-इंकम्बेंसी क्यों नहीं: राहुल गांधी

Rahul Gandhi PC on SIR: महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश चुनावों का जिक्र कर राहुल गांधी ने उठाए सवाल, कहा- मताधिकार देश की नींव है और वोटर की रक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी

New Delhi: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर कई सवाल उठाए। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश के चुनावों का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर बीजेपी पर सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी इनकंबेंसी का असर क्यों नहीं होता और पार्टी लगातार चुनाव कैसे जीतती है।

राहुल गांधी ने उठाया एंटी इनकंबेंसी का मुद्दा
राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय राजनीति में आम तौर पर सत्ता विरोधी लहर देखने को मिलती रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद भी कुछ समय में उनके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी देखने को मिली। राहुल ने सवाल किया कि ऐसा बीजेपी के मामले में क्यों नहीं दिखाई देता।

उन्होंने कहा कि कोई नेता बहुत लोकप्रिय हो सकता है, लेकिन उनके मुताबिक सवाल यह है कि बीजेपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर लगातार क्यों गायब रहती है। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस सवाल का जवाब तलाश रहे थे और अब उन्हें इसके पीछे कारण मिलने का दावा है।

‘चुनाव प्रभावित हुए’ का राहुल का दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्य प्रदेश के चुनावों का उल्लेख करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में वोटों की हेराफेरी हुई है। ये राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं; चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए अपनी प्रक्रियाओं का बचाव किया है।


मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्ट भी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे संस्थागत मतभेद के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति जताई है और कहा है कि आयोग के सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

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‘मताधिकार देश की नींव’
राहुल गांधी ने कहा कि मताधिकार देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वोट के अधिकार के जरिए संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को शक्ति मिलती है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और इसे संविधान से जोड़ते हुए कहा कि वोट खत्म करना संविधान को कमजोर करने के समान है।

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SIR को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार, विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। राहुल गांधी ने बुधवार को भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे और कहा था कि कथित ‘वोट चोरी’ लोगों के अधिकारों और संविधान पर सीधा हमला है।

चुनाव आयोग ने दूसरी ओर SIR और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि संबंधित फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और आयोग के तीनों सदस्यों की मंजूरी से अंतिम निर्णय हुए हैं।

इस पूरे विवाद के बीच राहुल गांधी के ताजा बयान ने एंटी इनकंबेंसी, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

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