
विदेशी आक्रांताओं ने भारत की ज्ञान परंपरा को नष्ट करने का प्रयास किया: CM योगी
गोरखनाथ मंदिर में पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान सत्र में बोले सीएम योगी, तक्षशिला-नालंदा से लेकर काशी और उज्जैन की ज्ञान परंपरा का किया उल्लेख; प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन पर दिया जोर।
Gorakhpur: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य सिर्फ भारत का वैभव लूटना नहीं था, बल्कि देश की ज्ञान परंपरा और बौद्धिक क्षमता को नष्ट करना भी था। उन्होंने कहा कि मंदिरों पर हुए हमले इसी सोच का हिस्सा थे। ब्रिटिश काल में इस प्रयास का तरीका बदला और भ्रम पैदा कर भारतीयों को उनकी परंपराओं, मूल्यों और जड़ों से दूर करने की कोशिश की गई।
गोरखनाथ मंदिर में गुरुवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के व्याख्यान सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।
भारत की ज्ञान परंपरा ने बनाया विश्वगुरु
सीएम योगी ने कहा कि भारत अपनी समृद्ध ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहलाता था। उन्होंने कहा कि आज के कई विकसित देशों का इतिहास 400 से 500 वर्षों का है, जबकि भारत में हजारों वर्ष पहले शिक्षा और शोध के बड़े केंद्र मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने तक्षशिला और नालंदा का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 2600 वर्ष पहले तक्षशिला और लगभग 1700 से 1800 वर्ष पहले नालंदा जैसे विश्वविद्यालय भारत की ज्ञान परंपरा के केंद्र थे। उन्होंने काशी, उज्जैन, कांची और नवद्वीप को भी प्राचीन काल के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में शामिल बताया।
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कुंभ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं: योगी
मुख्यमंत्री ने कुंभ की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि कुंभ केवल स्नान का आयोजन नहीं था। प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में संत और विद्वान एकत्र होते थे और अपने शोध, विचार तथा नवाचार पर चर्चा करते थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने अपने पर्व, त्योहार और मांगलिक कार्यों को आज भी भारतीय पंचांग से जोड़कर रखा है। उनके मुताबिक यह परंपरा भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान विरासत की निरंतरता को दर्शाती है।
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एक लाख से अधिक पांडुलिपियों का संरक्षण
सीएम योगी ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी में एक लाख से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां एकत्र की गई हैं। इनके संरक्षण और डिजिटाइजेशन का काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश की ज्ञान धरोहर केवल विश्वविद्यालयों या संस्थानों तक सीमित नहीं है। परिवारों, विद्वानों के घरों, प्राचीन मठों और मंदिरों में भी बड़ी संख्या में पांडुलिपियां और अन्य ऐतिहासिक सामग्री मौजूद है।
अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन और लखनऊ समेत विभिन्न स्थानों पर पांडुलिपियों के साथ ताम्रपत्र और शिलालेख भी मिले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जरूरत है कि इस ज्ञान परंपरा की पहचान की जाए, उसे प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखा जाए और आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
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