भारत की UNSC दावेदारी के खिलाफ 12 देशों का मोर्चा, आखिर क्या चाहता है ‘कॉफी क्लब’?

UNSC: UNSC Reform पर भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के बीच पाकिस्तान, तुर्की और इटली समेत 12 देशों ने स्थायी सीटों के विस्तार का विरोध किया, जानिए 'कॉफी क्लब' क्यों चाहता है निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाना.

New York: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की भारत समेत कई देशों की मांग के बीच विरोध भी तेज हो गया है। पाकिस्तान, तुर्की और इटली समेत 12 देशों के समूह ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ (Uniting for Consensus) ने सुरक्षा परिषद में नई स्थायी सीटें बनाने का विरोध दोहराया है। इस समूह को आमतौर पर ‘कॉफी क्लब’ के नाम से जाना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें अधिवेशन के दौरान समूह ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार का रास्ता नई स्थायी सीटें बनाने के बजाय निर्वाचित यानी चुने हुए सदस्यों की संख्या बढ़ाने से होकर जाना चाहिए।

क्या है यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस समूह?
‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ उन देशों का समूह है जो सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने की मांग का विरोध करता है। इसका तर्क है कि स्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने से कुछ देशों को लंबे समय के लिए विशेष अधिकार मिल जाएंगे और इससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से इस समूह को ‘कॉफी क्लब’ कहा जाता है। इसमें पाकिस्तान, तुर्की और इटली के अलावा कई अन्य देश शामिल हैं। समूह सुरक्षा परिषद में रोटेशन के आधार पर चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ाने की पैरवी करता है।

भारत की स्थायी सदस्यता की मांग से क्यों जुड़ा है विवाद?
भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना आज की वैश्विक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और बड़ी आबादी वाले देशों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

भारत को UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन देने वाले देशों का तर्क है कि भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

हालांकि, ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह की सोच इससे अलग है। वह स्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय चुने हुए सदस्यों की संख्या बढ़ाकर परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात करता है।

पाकिस्तान और तुर्की का विरोध क्यों अहम?
पाकिस्तान लंबे समय से UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का विरोध करता रहा है। भारत और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय और राजनीतिक मुद्दों को देखते हुए इस विरोध का सीधा असर UNSC सुधार की बहस पर पड़ता है।

तुर्की भी सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने के बजाय निर्वाचित सदस्यता बढ़ाने वाले मॉडल का समर्थन करता है। वहीं इटली भी ‘कॉफी क्लब’ का प्रमुख सदस्य है और लंबे समय से स्थायी सीटों के विस्तार को लेकर अलग मॉडल की वकालत करता रहा है।

‘कॉफी क्लब’ क्या चाहता है?
समूह के ताजा संयुक्त बयान में कहा गया है कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाली, लोकतांत्रिक, पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी संस्था बनाया जाना चाहिए।

इसके लिए समूह ने स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के बजाय चुने हुए सदस्यों की संख्या बढ़ाने का समर्थन किया है। उसके अनुसार इससे ज्यादा देशों और क्षेत्रों को सुरक्षा परिषद में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

समूह का कहना है कि निर्वाचित सदस्यता का विस्तार अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने में मदद करेगा और साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संप्रभु समानता के सिद्धांत को भी बरकरार रखेगा।

UNSC में अभी कितने स्थायी सदस्य हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इन पांचों देशों के पास वीटो पावर है।

बाकी 10 सदस्य अस्थायी यानी निर्वाचित सदस्य होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।

भारत का मुख्य लक्ष्य सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता हासिल करना है। लेकिन इसके लिए UNSC में सुधार की प्रक्रिया और सदस्य देशों के बीच व्यापक सहमति जरूरी है।

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वीटो पावर पर भी अलग राय
सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के साथ सबसे बड़ा मुद्दा वीटो पावर का है। मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के पास किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोकने की शक्ति है।

‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह का मॉडल स्थायी सीटों के विस्तार के बजाय निर्वाचित सीटों को बढ़ाने पर जोर देता है। इससे नए देशों को परिषद में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है, लेकिन उन्हें मौजूदा स्थायी सदस्यों जैसी वीटो शक्ति नहीं मिलेगी।

यही वजह है कि UNSC सुधार की बहस सिर्फ सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि भविष्य में सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य कौन हों, वीटो का अधिकार किसके पास हो और निर्णय लेने की प्रक्रिया कितनी प्रतिनिधित्व वाली हो।

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भारत के सामने क्या चुनौती है?
भारत को कई देशों का समर्थन प्राप्त है, लेकिन UNSC सुधार पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना जटिल प्रक्रिया है। एक तरफ भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे देश स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करते हैं, वहीं ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह निर्वाचित सदस्यता बढ़ाने वाले मॉडल को आगे रखता है।

इसलिए UNSC में भारत की स्थायी सीट की मांग केवल किसी एक देश के समर्थन या विरोध का मामला नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र की भविष्य की संरचना, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वीटो व्यवस्था से जुड़े व्यापक सुधारों पर निर्भर करता है।

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