सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चुनाव आयोग का विवाद, CJI सूर्यकांत ने अगले हफ्ते का दिया समय

Supreme Court on CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर एकतरफा फैसले लिए जाने के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इस मामले का विशेष उल्लेख (oral mentioning) किया, जिसके बाद कोर्ट ने इसे अगले हफ्ते सूचीबद्ध (list) करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर इस याचिका में मांग की गई है कि आयोग की सामूहिक शक्ति का इस्तेमाल किसी एक व्यक्ति द्वारा किए जाने पर रोक लगाई जाए।

याचिका में क्या लगा है आरोप?

याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी या सहमति के बिना आयोग के नाम पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि 2023 के कानून और संवैधानिक ढांचे के तहत निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है, जहां फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए।

याचिका के अनुसार, 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग की मंजूरी के बिना उठाए गए कदमों पर कम से कम 14 अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

SIR पर उठाए सवाल

याचिका में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की संवैधानिक वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। अर्जी में कहा गया है कि आयोग के एजेंडे, कार्यवृत्त (minutes) में देरी और बिना सर्वसम्मति के क्षेत्रीय अधिकारियों तथा अदालती अपीलों पर निर्णय लेना संस्थागत प्रक्रिया का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने मांग की है। 

कि जब तक इस मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को एकतरफा अधिकार का इस्तेमाल करने से रोका जाए और बिना बहुमत वाले निर्णयों पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगले हफ्ते इस मामले को सुनने की सहमति के बाद निर्वाचन आयोग से जुड़ा यह विवाद और गहरा गया है।

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