‘बेटियों को रोकना बंद करो’…, दिल्ली के बाद भोपाल में 300 से ज्यादा महिलाओं का हल्ला बोल

Bhopal Women Protest: भोपाल में 300 से ज्यादा महिलाओं का पैदल मार्च, सुरक्षा के नाम पर पाबंदियों का विरोध; बोलीं- बेटियों को रोकने के बजाय बेटों की सोच बदलने की जरूरत

Bhopal News: महिलाओं की सुरक्षा और उनकी आजादी को लेकर भोपाल में शुक्रवार शाम बड़ा प्रदर्शन हुआ। 300 से ज्यादा महिलाओं और युवतियों ने कमला पार्क से गैमन मॉल तक पैदल मार्च निकालकर महिलाओं पर लगाई जाने वाली पाबंदियों का विरोध किया। प्रदर्शन में बेटियों के साथ उनकी मां भी शामिल हुईं।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को शाम के बाद घर से बाहर निकलने से रोकना या सुनसान रास्तों से बचने की सलाह देना आखिर कब तक जारी रहेगा? महिलाओं ने कहा कि उन्हें बंदिशों की नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल की जरूरत है।

कमला पार्क से गैमन मॉल तक निकला पैदल मार्च
शुक्रवार शाम आयोजित इस मार्च में 300 से अधिक महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं। प्रदर्शनकारियों ने कमला पार्क से गैमन मॉल तक पैदल मार्च निकालकर अपनी बात रखी। इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा, सार्वजनिक स्थानों पर उनकी स्वतंत्र आवाजाही और समाज की जिम्मेदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

मार्च में शामिल महिलाओं का कहना था कि सुरक्षा के नाम पर लड़कियों को पार्क जाने, देर शाम बाहर निकलने या सुनसान रास्तों पर जाने से रोकना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनका कहना है कि महिलाओं की गतिविधियों पर पाबंदी लगाने के बजाय सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

‘पाबंदी हमेशा लड़कियों पर ही क्यों?’
प्रदर्शन की संयोजक विदुषी ने कहा कि अक्सर लड़कियों से कहा जाता है कि वे शाम 6-7 बजे के बाद पार्क या दूसरी जगहों पर न जाएं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी पाबंदियां हमेशा लड़कियों पर ही क्यों लगाई जाती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर किसी लड़की या महिला को सड़क पर भद्दे कमेंट या असुरक्षित माहौल का सामना करना पड़ता है, तो समाधान उसे घर में रोकना नहीं होना चाहिए। जरूरत उन लोगों की सोच बदलने की है जो महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करते हैं।

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‘बेटों की सोच सुधारने की जरूरत’
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए समाज में पुरुषों की सोच और व्यवहार में बदलाव जरूरी है। बेटियों को यह बताने के बजाय कि वे कहां और कब बाहर जाएं, बेटों को महिलाओं का सम्मान करने और सार्वजनिक स्थानों पर जिम्मेदार व्यवहार करने की शिक्षा दी जानी चाहिए।

महिलाओं ने यह भी कहा कि शहर ऐसा होना चाहिए जहां महिलाएं दिन हो या शाम, बिना डर के अपने काम से बाहर निकल सकें। उनके मुताबिक सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल महिलाओं की नहीं, बल्कि प्रशासन और पूरे समाज की है।

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महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
भोपाल में हुआ यह मार्च महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती सार्वजनिक चर्चा के बीच सामने आया है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने स्पष्ट किया कि वे सुरक्षा के नाम पर अपनी आजादी सीमित किए जाने के बजाय ऐसा वातावरण चाहती हैं, जहां उन्हें बिना डर के सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल करने का अधिकार मिले।

प्रदर्शनकारियों का संदेश था कि महिलाओं को रोकने के बजाय असुरक्षा की वजहों पर रोक लगाई जाए।

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