
पितृ पक्ष में कौवों को भोजन कराने का क्या है महत्व? जानें शकुन-अपशकुन का रहस्य
Pitru Paksha: हिंदू धर्म में पितृपक्ष (Pitru Paksha) का विशेष महत्व है। इस दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इन 16 दिनों में पितर धरती पर आते हैं और उन्हें तृप्त करने के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालकर जीवों विशेषकर कौवों को खिलाया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति श्राद्ध कर्म तो करता है लेकिन कौवों को भोजन नहीं कराता, तो उसका श्राद्ध अधूरा माना जाता है।
कौवों को भोजन कराने की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं और त्रेतायुग की कथा के अनुसार, इंद्र के पुत्र जयंत ने सबसे पहले कौवे का रूप धारण किया था। जब भगवान श्रीराम माता सीता के साथ वन में थे, तब जयंत ने कौवे का रूप लेकर माता सीता के पैर में चोंच मार दी थी। इससे माता को चोट लगी और क्रोधित होकर श्रीराम ने तिनके का बाण चलाकर जयंत की आंख फोड़ दी थी।
जब जयंत ने अपनी भूल स्वीकार कर माफी मांगी, तब भगवान राम ने उसे वरदान दिया कि “तुम्हें अर्पित किया गया भोजन सीधे पितरों को प्राप्त होगा।” तभी से श्राद्ध पक्ष में कौवों को भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है। यही कारण है कि कौवों को सताया या मारा नहीं जाता है।
पितृ पक्ष में जरूर निकालें ‘पंच बली’
श्राद्ध पक्ष के दौरान भोजन का कुछ हिस्सा इन पांच जीवों के लिए अवश्य निकालना चाहिए:
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चींटी
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गाय
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कौआ
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कुत्ता
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देवादि बलि
कौवे से जुड़े रहस्य
हमारे ग्रंथों और पुराणों में कौए से जुड़े कई अद्भुत और विचित्र रहस्य बताए गए हैं। मान्यता है कि कौए ने देवताओं और राक्षसों के साथ समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत का रस चख लिया था, जिस कारण इसकी कभी भी स्वाभाविक या बीमारी से मृत्यु नहीं होती। इसकी मृत्यु हमेशा आकस्मिक होती है और जिस दिन कौए की मृत्यु होती है, उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता। यह पक्षी कभी अकेले भोजन नहीं करता बल्कि साथी के साथ मिलकर ही खाता है।
पुराणों के अनुसार, कौआ अतिथि आगमन का सूचक और पितरों का आश्रय स्थल माना जाता है, क्योंकि कोई भी क्षमतावान आत्मा कौए के शरीर में विचरण कर सकती है। भादौ महीने के ये 16 दिन हर घर की छत पर कौए का मेहमान बनना पितरों की तृप्ति का प्रतीक माना जाता है।
शकुन-अपशकुन
कौवे से जुड़े कई शकुन और अपशकुन भी हमारे समाज में प्रचलित हैं। यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो कौवे को भोजन जरूर कराना चाहिए। घर की मुंडेर पर कौए के बोलने से मेहमानों के आने की सूचना मिलती है।
यदि कौआ घर की उत्तर दिशा से बोले तो जल्द ही मां लक्ष्मी की कृपा होने का संकेत माना जाता है, पूर्व दिशा में बोलने पर शुभ समाचार मिलता है, और दक्षिण दिशा से बोलने पर बुरा समाचार आने की आशंका रहती है।
कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट और शत्रुओं का नाश होता है। वसिष्ठस्मृति के अनुसार, श्रद्धा पूर्वक किया गया कार्य ही श्राद्ध है और इस दौरान कुतप काल तथा काले तिलों का विशेष महत्व होता है।





