
Lucknow News: बॉन्डेड डॉक्टरों का जोरदार प्रदर्शन, पुलिस बस के आगे खड़ी हुई महिला
Lucknow Doctors Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को बॉन्डेड डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन बेहद उग्र हो गया। हजरतगंज स्थित ऐतिहासिक गांधी प्रतिमा पर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए बॉन्डेड डॉक्टरों ने वेतन विसंगति दूर करने और ‘समान काम, समान वेतन’ का नियम लागू करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
इस दौरान जब पुलिस प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को हिरासत में लेकर बस में बैठाने लगी, तो मौके पर दिल्ली जैसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।
पुलिस बस के आगे डट गई महिला डॉक्टर
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस जब गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों को बस में लादकर ले जाने लगी, तभी एक साहसी महिला डॉक्टर अचानक बस के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई। महिला डॉक्टर ने बस को आगे बढ़ने से रोक दिया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करती रही। पुलिसकर्मियों को बस हटाने और महिला डॉक्टर को वहां से हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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🚨 लखनऊ में डॉक्टरों का गुस्सा सातवें आसमान पर!🏥🔴वेतन समानता और एरियर भुगतान की मांग को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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डिप्टी सीएम ने 24 घंटे में शासनादेश जारी करने का वादा किया था, लेकिन 40 दिन बीतने के बाद भी इंतजार खत्म नहीं हुआ।❓ आखिर कब मिलेगा डॉक्टरों को उनका हक?
📢 वादे नहीं, अब ठोस कार्रवाई की मांग!#LucknowNews #BondedDoctors #DoctorsProtest #UPNews #SalaryDiscrimination #DoctorRights #UttarPradesh #HealthcareNews #SalaryEquality #DoctorsUnity
— Live New India (@livenewindia01) October 13, 2026
वादे से मुकरने का आरोप
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि समान एमबीबीएस डिग्री, समान भर्ती प्रक्रिया और एक जैसी बॉन्ड अवधि होने के बावजूद उनके वेतन में भारी असमानता है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को प्रतिमाह ₹1 लाख या उससे अधिक का वेतन दिया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को मात्र ₹50 हजार से ₹65 हजार के बीच वेतन मिल रहा है।
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डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने खुद गांधी प्रतिमा पर आकर डॉक्टरों से मुलाकात की थी और 24 घंटे के भीतर शासनादेश (GO) जारी कर वेतन विसंगति दूर करने का लिखित वादा किया था।
हालांकि, हफ्तों बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे नाराज होकर उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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