
‘आप कौन हैं, बॉन्ड क्यों तोड़ा?’ CJP नेताओं पर हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी…
Supreme Court on CJP: जमानत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदर्शन की अनुमति, बॉन्ड की शर्तों और बैरिकेड तोड़ने को लेकर सवाल उठाए।
Delhi: CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदर्शन के तरीके और निर्धारित नियमों को लेकर कई सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, तो वे वहां क्यों गए? कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के आदेश को चुनौती देने के लिए पहले अपील क्यों नहीं की गई और सीधे हाई कोर्ट का रुख क्यों किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बैरिकेडिंग तोड़ने और शांति व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बैरिकेड किसी खास उद्देश्य से लगाए जाते हैं और वे केवल किसी एक समूह के लिए नहीं होते। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हैं, तो वहां अधिक लोगों के पहुंचने और स्थिति बिगड़ने की आशंका पैदा हो सकती है।
‘बॉन्ड तोड़कर क्यों गए जंतर-मंतर?’
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सवाल किया कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध था, तो प्रदर्शनकारी वहां क्यों पहुंचे? अदालत ने बॉन्ड की शर्तों और उनके कथित उल्लंघन को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि संबंधित शर्तों को तोड़ने की वजह क्या थी।
अदालत ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के नारे को लेकर भी सवाल किया। कोर्ट की टिप्पणियों में कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी का मुद्दा प्रमुख रहा।
SEM के आदेश को पहले चुनौती क्यों नहीं दी?
दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP पक्ष से यह भी पूछा कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील क्यों नहीं की गई। अदालत ने सवाल किया कि संबंधित पक्ष सीधे हाई कोर्ट क्यों पहुंचा।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट का काम शांति भंग होने की आशंका से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि SEM को शांति व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं पर विचार करना होगा।
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बैरिकेड तोड़ने पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने बैरिकेडिंग के उद्देश्य को समझाते हुए कहा कि बैरिकेड केवल किसी खास प्रदर्शनकारी समूह को रोकने के लिए नहीं होते, बल्कि व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। इन्हें तोड़ने से भीड़ बढ़ने और ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है, जिस पर प्रदर्शनकारियों का नियंत्रण न हो।
कोर्ट ने विदेशों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान आंदोलन के हिंसक रूप लेने की घटनाओं का भी उल्लेख किया। अदालत की टिप्पणी का संदर्भ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और किसी प्रदर्शन के बेकाबू होने की आशंका से जुड़ा था।
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क्या है CJP नेताओं का मामला?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को सोमवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में हाल ही में नियुक्त विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। मजिस्ट्रेट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाने का आदेश दिया था।
इसके बाद जमानत से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने प्रदर्शन की जगह, बॉन्ड की शर्तों, कानूनी प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए।
फिलहाल, सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों और जमानत पर अंतिम आदेश के बीच अंतर करना जरूरी है। जमानत याचिका पर अंतिम निर्णय की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
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